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एक पत्रकार का अपनी बिरादरी को समर्पित पत्र...आंखे है पर काम की नहीं!

एक पत्रकार का अपनी बिरादरी को समर्पित पत्र...आंखे है पर काम की नहीं! शाम को जोधपुर के कुछ पत्रकार। बड़े चैनलों के बैनर तले। अपने न...

एक पत्रकार का अपनी बिरादरी को समर्पित पत्र...आंखे है पर काम की नहीं!

शाम को जोधपुर के कुछ पत्रकार। बड़े चैनलों के बैनर तले। अपने निजी फेसबुक खाते पर। कुछ हंसी ठिठोली कर रहे थे। हां उनकी नजर में। वे दुनियां के सबसे बड़े संकट पर लाइव कर रहे थे। लाइव तो था लेकिन इन सबकी आंखें बंद थी। रोम जल रहा था और...। ये कहावत बेहद चर्चित है। लेकिन हर दौर में सत्य है। सूबे का दूजे नंबर का जलता जोधपुर उन्हें नजर नहीं आ रहा। वे लाइव में प्रशासन की पीआर करते नजर आए। मैंने एक महिने पहले भी आगाह किया था। लेकिन गाइड लाइन की पालना नहीं हुई। धारा 144 की पालना नहीं हुई। प्रशासनिक लचरता ने आज जोधपुर को "जलता जोधाणा" बना दिया। बावजूद इसके देश के जिम्मेदार पत्रकार। चौराहे पर सरेआम प्रशासन का गुणगान करने पर आमादा था। पुलिस का गुणगान कर रहे थे। यकीनन पब्लिक सही है। हमें जनता जिन नामों से पुकारने लगी है। वे सही है। जब महज 6 केस पर जोधपुर के कलेक्टर अतिउत्साह में प्रेस को सम्बोधित कर रहे थे। मैंने तब भी कहा था। कि उनका ये बयां। मारवाड़ के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी को जन्म देगा। जनता क्या इस लाइव को देखें। मैं बतौर पत्रकार देख रहा था। प्रशासन-पुलिस की वाहवाही को। ये पत्रकार कोविड19 जैसे संजीदा मसले पर। चौराहे पर रिपोर्टिंग के नाम पर मजाक कर रहे थे। इनके लाइव के बाद शाम होते-होते जोधपुर पोजेटिव केस की शतक बनाने को खड़ा था। कोई बतौर पत्रकार ये पुछने की हिम्मत तो करे। प्रशासन का Action Plan क्या है? सूबे की सरकार का घर है जोधपुर। क्या अपने घर को बचाने में इतनी कमजोर पैरवी? रेपिड एक्शन की कोई बात करी लाइव में। Lock Down खोलने की पैरवी करने से पहले। असल तस्वीर तो जान लेते। समानान्तर सिस्टम चलाने की कोशिश क्यों? जनता इस दौर में घर से बाहर आना चाहती होगी। लेकिन वक्त का तकाजा क्या कहता है? क्या सुरक्षित होगा इस माहौल में घर से बाहर आना? क्या लाइव में मेडिकल बेस पर तैयारियों पर चर्चा की? कितने इंतजाम है? कुछ नहीं..कुछ नहीं। यूं सड़कों पर रिपोर्टिंग के नाम पर लाइव करोगे। तो जनता भाट ही कहेगी। बिकाऊ भी कहेगी। जनता का नजरियां बदलो। लाइव करे स्वागत है। होमवर्क करें। आप जो बड़े बैनर के माउथ पीस लेकर शहर की सड़कों पर उतरे है। वे बेहद गंभीर परिणाम देने वाले है। संभल जाओं। वक्त कयामत का है। पीआर मत करो बल्कि पीड़ समझो। आवाज बनो अवाम की।
आपका
- निखिल व्यास

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