Page Nav

SHOW

Breaking News:

latest

एक शख्सियत आनंद कुमार जो आपको सिखायेंगे बुरे समय से कैसे लड़ें और सीखें।

एक शख्सियत आनंद कुमार जो आपको सिखायेंगे बुरे समय से कैसे लड़ें और सीखें। मुंबई। आज मैं एनजे वेल्थ-फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स डिस्ट्र...

एक शख्सियत आनंद कुमार जो आपको सिखायेंगे बुरे समय से कैसे लड़ें और सीखें।

मुंबई। आज मैं एनजे वेल्थ-फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के लाइव सेशन में मौजूद था, जब मशहूर गणितज्ञ, शिक्षक और विश्वविख्यात सुपर-30 बैच के संस्थापक आनंद कुमार कोरोना वायरस की चुनौतियों से लड़ने के गुर हजारों लोगों को सिखा रहे थे।

आनंद कुमार एक ऐसी शख्सियत हैं जिनके बारे में जितनी तारीफ करें उतनी कम है। बॉलीवुड सुपरस्टार रितिक रोशन की सुपरहिट फिल्म 'Super-30' आनंद कुमार की ही बायोपिक (जीवनी) थी।
आनंद कुमार ने लाइव सेशन के दौरान हमें बताया कि उन्हें अपने जीवन में बहुत सम्मान मिला, मगर एक ही चीज सीखी जो ये है कि सही समय का इंतजार करना और धैर्य रखना बहुत जरूरी है। आनंद ने कहा कि जब लोग कोरोना संकट में डर गए हैं तब मेरा और मेरे शुभचिन्तकों का हौसला और भी ज्यादा बढ़ गया है। जीवन चुनौतियों से भरा है। हमारे जीवन में जितना चैलेंज आयेगा उतना ही हम आगे बढ़ते हैं।
आनंद ने कहा कि मैं कोई मोटिवेटर नहीं हूं मगर मैंने एक शिक्षक के तौर पर जो भी कुछ सीखा है वही अनुभव आप सभी से शेयर करूंगा। आनंद ने कहा कि जैसा कि आप ने फिल्म सुपर 30 में देखा था कि मेरा पिता जी पोस्ट ऑफिस में कर्मचारी थे, छोटे से घर में मेरा परिवार रहता था। मेरे पिता जी सिखाते थे कि विपरीत नदी की धारा में बहकर पत्थर का सीना तोड़ना तभी कोई बात बनेगी। पिता जी का फॉर्मूल मैंने सीखा और चलता गया। एक चैलेंज आया जब पिता जी ने कहा कि जो तुम्हारा मन है वो करो-मगर मेरे स्थिति मेरे पक्ष में नहीं थी। फिल्म में जो दिखाया गया वो सब कुछ मेरे जीवन का सच ही है। मैं दो दिन बनारस बीएचयू में पढ़ता था, हॉस्टल में जमीन पर मैं सोता था। कई बार मुझे भगा दिया जाता था कि तुम यहां के स्टूडेंट नहीं हो भागो यहां से। मगर पिता ने सिखाया था अपने निश्चय पर डटे रहो।
आपको आपकी नई सोच ही आगे बढ़ाती है। मैंने कुछ पेपर्स लिखे जो विदेश के जर्नल्स में छपे। हवाई जहाज का खर्च तक मेरे पास नहीं था। हम लोगों ने फीस के लिए बहुत संघर्ष किया मगर कहीं से कोई मदद नहीं मिली। एक बार मेरे पिता जी मायूस हो गए जब मैं कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने केवल पैसों की कमी की वजह से नहीं जा पाया, तब मैंने ही पिता जी को समझाया कि मौके बहुत से मिलेंगे।
कोरोना वायरस जब चाइना से आया तो यूरोप होते हुए भारत आया। मेरे पिता जी कहते थे कि हर स्थिति में हर हालात में कुछ अच्छा करो, कुछ नया करो। सबसे अलग हटकर करो। मुझे सरकारी नौकरी मिल रही थी मगर पिता जी के सपनों को मैं पूरा करना चाहता था। खराब परिस्थिति में जब मेरीमांं पापड़ बनाती थी तो मैं और मेरा भाई पापड़ बेचने जाते था। मगर जीवन में संघर्ष किया और चैलेंज को स्वीकार कर लिया। कभी हिम्मत नहीं हारी। हमने कभी खुद को हारने नहीं दिया। हमारे समाज में टैलेंट बहुत है। मैंने भाई को बुलाया और ऐसे बच्चों के लिए काम करने के लिये सुपर-30 की योजना बनाई।
आज कोरोना आया है तभी हमने लाइव के माध्यम से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए हजारों लोगों से जुड़ना जरूरी समझा है। कोरोना के क्राइसिस ने ही हमें लाइव के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ा है। क्राइसिस हमेशा कुछ नया देता है। फिल्म सुपर-30 में शिव रंजन के विचारों से ही मेरी पूरी कहानी चलती है।
आनंद कुमार ने कहा कि हाल ही में मैं वेबिनार कर रहा था तो लोगों को यही बताया कि आप हर हाल में खुश रहो। मेरा स्टूडेंट शिव रंजन आज बहुत अच्छी पोजीशन में है। जर्मनी से एनजे नेटवर्क के लाइव वेबिनार में आते हुए शिव रंजन ने कहा कि मैं समस्तीपुर बिहार का रहने वाला हूं। आज का समय बहुत कुछ सीखने का है। मेरा फैमिली बैकग्राउंड बहुत अच्छा नहीं था। मैंने अपना इंटरमीडिएट समस्तीपुर से ही पूरा किया। उस समय मेरे पास जीवन को लेकर कोई दिशा नहीं थी। मैं अपने परिवार को एक दिशा देना चाहता था। आऩंद सर ने मुझे सपोर्ट किया। पिछले चार सालों से आर्टिटेक्ट के तौर पर जर्मनी में काम कर रहा हूं।  जब मैं आनंद सर से मिला तो मैंने गोल बनाया कि लोगों को सरकारी नौकरी में पास कराने के लिए कोचिंग संस्थान शुरू करूंगा। मगर आनंद सर के कहने पर ही मैंने अपनी सारी ऊर्चा केवल और केवल अपने विकास में लगा दी। हालांकि, मैं अपने जैसे गरीब युवाों की अभी भी मदद करता हूं। उन्हें ऑनलाइन शिक्षा देता हूं।
आनंद ने कहा कि आज एनजे कंपनी का लाइव वेबिनार चल रहा है जिसे हजारों लोग देख रहे हैं। मगर बहुत कम लोगों को पता है कि इसके पीछे एनजे का कितना बड़ा संघर्ष है। वैसे ही मैंने भी संघर्ष किया है। मुझे तमाम लोगों ने कहा कि मैं मदद करना चाहता हूं मगर मैंने कहाकि मुझे किसी से मदद की कोई आवश्यता नहीं है। गरीब बच्चों को पढ़ाता हूं उनके विश्वास की बदौलत आज सुपर-30 बैच वर्ल्ड फेमस है।
मुझपर और मेरी टीम पर हमला हुआ था ये फिल्म में भी दिखाया गया है। मगर इस चुनौती को भी हमने स्वीकार किया और हम बुरे समय से डट कर लड़े। आनंद कुमार ने कहा कि मैं यही कहना चाहता हूं कि बुरे समय से डट कर मुकाबला करें। आप जीतेंगे। ये दुनियां आप के लिये ही ईश्वर ने बनाई है आपको हमेशा ऐसा ही सोचना होगा। तभी हम और आप हमेशा सकारात्मक मार्ग पर चल सकेंगे।
@प्रस्तुति-भरतकुमार सोलंकी, वित्त विशेषज्ञ

कोई टिप्पणी नहीं