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टिड्डी दल पर रोकथाम को लेकर कृषि राज्यमंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ बैठक की।

टिड्डी दल पर रोकथाम को लेकर कृषि राज्यमंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि वैज...

टिड्डी दल पर रोकथाम को लेकर कृषि राज्यमंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ बैठक की।

केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की टीम टिड्डी प्रभावित इलाकों में जाकर रोकथाम के हरसंभव प्रयास करेगी एवं नए समाधान खोजेगी।

नई दिल्ली। पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में टिड्डी दल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई को सफल बनाने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने रविवार को दिल्ली के पूसा कैम्पस में आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों के कृषि वैज्ञानिकों के साथ विस्तार से चर्चा की तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में केंद्र सरकार की ओर से गठित टिड्डी रोकथाम प्रणाली को सुदृढ़ करने, केंद्र-राज्य के प्रभावी समन्वय, किसानों के ट्रेक्टर एवं मशीन का किराये पर प्रयोग, नयी मशीनों व ड्रोन की खरीद, हेलीकाप्टर स्प्रे, टीडी सर्विलेंस एवं मोबाइल एप्प इत्यादि के प्रयोग सहित कई विषयों पर चर्चा हुईI 

बैठक के दौरान कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि इन सभी समेकित प्रबंधनों के प्रयोग द्वारा हम टिड्डी का प्रभावी नियंत्रण कर सकते है। हमें टिडडी के ग्रीष्म  प्रजनन को रोककर संभावित नुकसान को रोकना होगा। सकता है। चौधरी ने कहा कि COVID-19 के समय आई इस आपदा का भी हम प्रभावी रूप से नियंत्रण करने में कामयाब होंगे।

टिड्डियों ने किया है दुबारा हमला : कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि जैसलमेर, बाड़मेर सहित राज्य के पश्चिमी जिलों में पिछले साल मई से ही टिड्डी दल सक्रिय हैं। कृषि मंत्रालय और केंद्रीय टिड्डी चेतावनी संगठन के संयुक्त प्रयासों से टिड्डियों को रोकने में काफी हद तक सफलता मिल गई थी। खरीफ फसल के दौरान टिड्डी दलों को नियंत्रित कर लिया गया था, लेकिन अब पिछले कुछ दिनों से टिड्डियों ने पुनः हमला कर दिया। इससे कई जगह फसलों और वनस्पतियों को नुकसान हुआ है।

केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार हर सम्भव तरीके से टिड्डी दल को नियंत्रित करने में लगी हुई है। किसानों को फ्री में कीटनाशक उपलब्ध कराया जाएगा। रसायन स्प्रे करने के लिए ट्रेक्टर और गाड़ियों के साथ ही हवाई स्प्रे मशीनों की व्यवस्था की जा रही है। इससे टिड्डी को नियंत्रित करने में कामयाबी मिलेगी।

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