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पनावड़ा के डॉक्टर ओमप्रकाश साँई बीकानेर के ट्रॉमा सेंटर में दे रहे हैं सेवाएं।

पनावड़ा के डॉक्टर ओमप्रकाश साँई बीकानेर के ट्रॉमा सेंटर में दे रहे हैं सेवाएं। बाड़मेर। वुहान शहर से निकले कोरोना नामक वायरस के...

पनावड़ा के डॉक्टर ओमप्रकाश साँई बीकानेर के ट्रॉमा सेंटर में दे रहे हैं सेवाएं।

बाड़मेर। वुहान शहर से निकले कोरोना नामक वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया को तहस नहस करके रख दिया हैं। आज इस संक्रमण की चपेट में दुनियां के लगभग 200 से भी ज्यादा देश आ चुके हैं, इस खतरनाक वायरस ने विश्व को इतना अंदर तक चोटिल किया हैं कि वापस जख्म भरने में कई महीने बीत जाएंगे। आज इस महामारी से उबरने के लिए हर तरह के प्रयास कर रहे हैं और रोज करोड़ों रुपयों को खर्च कर रहे। इस तरह एकाएक बढ़े खर्च से पूरे विश्व के लगभग हर देश आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहे हैं। ऐसे में जहाँ हर देश मे अपनी प्रजा की रखवाली के लिए ओर इस वैश्विक महामारी से बचाव के लिए जहा चिकित्सक एवं पुलिसकर्मी अपनी सेवाएं देने के लिए मैदान में डटे हुए है। ये बहादुर कर्मवीर आज देश को मुश्किल हालातों से बाहर निकालने में अपनी ईमानदारी के साथ ड्यूटी पर लगे हैं। ऐसे देश की जनता को बचाने वाले लाखों कर्मवीरों को दो कदम गांव की ओर परिवार सेल्यूट करता हैं। आज हम आपको मिलवाते हैं बाड़मेर जिले के बायतु तहसील के छोटे से गांव पनावड़ा निवासी केशाराम साँई के परिवार में जन्मे डॉक्टर ओमप्रकाश साँई से जो इस मुश्किल परिस्थितियों के बीच बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के सामान्य सर्जरी ट्रॉमा सेंटर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। साँई बताते हैं कि दीपावली के बाद से यही हैं और घर जाने के लिए सोच ही रहे थे कि कोरोना के चलते अपने आपको यही लगातार ड्यूटी पर लगा रखा हैं। चूंकि बीकानेर का प्रिंस बिजयसिंह मेमोरियल अस्पताल बड़ा होने के कारण यहाँ मरीजो की ज्यादा आवाजाही रहती हैं और कोरोना संक्रमण फेलने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में चिकित्सक तैनात हैं। इस संकट के दौर में हर इंसान अपना कर्तव्य निभाने में लगा हुआ हैं तो हम पीछे कैसे रह सकते, इसी ख्याल को जेहन में रखते हुए अपना फर्ज निभा रहे हैं। साँई का कहना हैं कि जल्द ही भारत कोरोना मुक्त होकर सुरक्षित हो जाएगा। आज हर अवाम यही चाहती हैं कि इस महामारी से जल्दी छुटकारा मिले और हालात सामान्य हो जाए। जिससे कि देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में गति मिल सके और जो पिछले 2 महीनों से भी ज्यादा समय से लॉक डाउन के तहत घरों में बैठे हैं उनका भी रोजगार रफ्तार पकड़ सके, ओर परिवार का ठीक से लालन पालन हो सके।

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