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गिड़ा, झरड़ा ओरण में विश्व जैव विविधता दिवस का आयोजन हुआ।

गिड़ा, झरड़ा ओरण में विश्व जैव विविधता दिवस का आयोजन हुआ। @घमण्डाराम परिहार बाड़मेर/बायतू। मरुस्थलीय पारिस्थितिकी में ओरण क्षे...

गिड़ा, झरड़ा ओरण में विश्व जैव विविधता दिवस का आयोजन हुआ।

@घमण्डाराम परिहार
बाड़मेर/बायतू। मरुस्थलीय पारिस्थितिकी में ओरण क्षेत्र का महत्वपूर्ण स्थान है। ओरण’ की परम्परा के सम्बन्ध में मान्यता यह है कि गाँव की भूमि का एक भूखंड अपने लोकदेव के प्रति अपार श्रद्धा के रूप में लोक कल्याण हेतु छोड़ने से उनके प्रति ‘उऋण’ हुआ जा सकता है और इसी कारण यह भूखंड ‘ओरण’ कहलाता है। मरुक्षेत्र में इन ‘ओरणों’ का पारिस्थितिकी तन्त्र से बहुत ही निकट सम्बन्ध है, बढती जनसंख्या और घटते वन क्षेत्र के बीच ये ओरण क्षेत्र ही जैव विविधता को बचाये हूए है। आज जब सम्पूर्ण विश्व कोरोना जैसी महामारी से जुझ रहा है तो जैव विविधता का बचाव बहुत ही जरूरी है। प्रकृति में अगर एक भी जैव जाति नष्ट होती है तो सम्पूर्ण खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। इको क्लब राउमावि पूनियो का तला के तत्वावधान में विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर झरड़ा की ओरण में आयोजित कार्यक्रम में व्याख्याता संतोष कुमार गोदारा ने विचार व्यक्त किये। उन्होंने बताया कि अगर इन ओरण क्षेत्रों में सही तरीके से प्रयास किये जाए तो जैव विविधता के ये संरक्षण स्थल बन सकते हैं, साथ ही इन मंदिरों की प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। जैव विविधता संरक्षण इको क्लब का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इको क्लब के द्वारा इस वर्ष रोपे गये पोधौ की सार संभाल की गई, पानी डाला गया, उनकी तारबंदी की मरम्मत की गई, और  पक्षियों के चबूतरे की सफाई की गई, परिंडे लगाए गए। इको क्लब से जुड़े स्काउट्स की विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मानसभा का आयोजन किया गया और विभिन्न सेवाकार्यों की जिम्मेदारी बांटी गई। इस अवसर पर कोरोना जागरूकता को लेकर निर्देश, मास्क, सोशल डिस्टेंस, आरोग्य ऐप्स की जानकारी आदि जानकारी भी दी गई, और घर बैठे विद्यार्थियों से पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।

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