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कोरोना वॉरियर्स के रूप में शिक्षक बहुआयामी कड़ी।

कोरोना वॉरियर्स के रूप में शिक्षक बहुआयामी कड़ी। @घमण्डाराम परिहार कोरोना महामारी से सम्पूर्ण विश्व त्रस्त है। हमारे देश में...

कोरोना वॉरियर्स के रूप में शिक्षक बहुआयामी कड़ी।

@घमण्डाराम परिहार
कोरोना महामारी से सम्पूर्ण विश्व त्रस्त है। हमारे देश में भी यह वायरस भयावह रूप में पैर-पसार रहा है।इससे बचने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकारें साझा प्रयास कर रही है, सम्पूर्ण देश मे लोकडाउन लागू है।इस विकट परिस्थिति से निपटने के लिए सभी सरकारी महकमें कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहें।डॉक्टर्स, नर्सिंग कर्मी, लैब के कार्मिक जिस संजीदगी से काम कर रहें है, इन दिनों वे बिना घर गए कई दिनों से लगातार लंबी ड्यूटी कर रहें जो कि क़ाबिल-ऐ-तारीफ़ है। कोरोना पॉजिटिव लोगों का ईलाज, स्क्रीनिंग, सैम्पल लेने, आइसोलेशन वार्ड जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटी इन दिनों चिकित्साकर्मी निभा रहे हैं। इस प्रकार की ड्यूटी में उनपर भी संक्रमण का खतरा मंडरा रहा होता है, फिर भी ये बुलंद हौसले के साथ दिन-रात इस उम्मीद के साथ ड्यूटी निभा रहे हैं कि कारोना को जरूर हरा देंगे। पुलिस की भूमिका भी कोरोना से लड़ने व लॉकडाउन का पालन करवाने में बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, हमारे सिपाही दिन-रात ड्यूटी निभा रहें है, बात चाहे चैक पोस्ट पर ड्यूटी की हो या बाजार में लॉकडाउन पालना करवाने की हो पुलिस अधिकारी व कार्मिक संजीदगी से अपनी ड्यूटी निभा रहें है। हाल ही में जोधपुर-बाड़मेर सीमा पर (धारावी) महाराष्ट्र से घर आ रहे संक्रमित व्यक्ति पुलिस की सतर्कता की बदौलत ही जिले में प्रवेश नहीं कर पाया, जो पुलिस की सतर्कता का उदाहरण हैं। इसके इतर बात करें तो इन दिनों कई जगह पुलिस के जवान भूखों को भोजन तक बांट रहें है जो पुलिस की जिम्मेदाराना व मानवीयता की मिसाल है।
कोरोना महामारी से बचाव की कड़ी में शिक्षा विभाग की भूमिका भी कम नहीं है, इसमें शिक्षा विभागीय अधिकारियों व शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। किल तक जो शिक्षक विद्यालयों में शिक्षण कार्य करवा रहें थे आज वे एक अटल योद्धा की तरह लोगों को कोरोना महामारी के प्रति सजग कर रहें हैं।शिक्षकों की ड्यूटी स्कूलों में बनाये गए क्वारेंनटन सेंटरों, पुलिस की मदद हेतु चैक-पोस्टों, ग्राम सतर्कता प्रभारी, होम आइसोलेशन, कंट्रोल रूम, कोरोना सहायता केंद्रों पर लगी हुई है। शिक्षक डोर टू डोर सर्वे कर ग्राम में बाहर से आये व्यक्तियों की सूचना प्रशासन तक पहुंचाने व उन व्यक्तियों को होम आइसोलेट करने, लोगो को सोशल-डिस्टेंसिंग रखने की हिदायत देने, कोरोना से बचाव के तरीकों से रूबरू करवाना, लोगों के मन से कोरोना का डर दूर करना, आवश्यकता मंद परिवारों की पहचान कर उनको राशन सामग्री दिलाने में मदद करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य कर रहें है। शिक्षक हर छ:घण्टे में अपने क्षेत्र में बाहर से आये लोगों के स्वास्थ्य व उनके होम आइसोलेशन में होने की सूचना प्रशासन को देते हैं। चाहे शहर हो या सुदूर रेगिस्तानी गांव शिक्षक जिंदादिली से कोरोना से लड़ने में महत्पूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।रेगिस्तानी गांवो में जहां दूर-दूर तक रेतीले धोरों में बची आबादी के बीच  लोगों को सतर्क करने व आमजन को कोरोना से पेनिक होने से बचाने एक योद्धा की तरह शिक्षक डटे हुए हैं।इतने सब महत्वपूर्ण कार्य शिक्षक बिना किसी सुविधा के कर रहें है। वे कंधे पर पानी की बोतल व हाथ मे एक बैग लिए यह कार्य कर रहे हैं।मास्क भी उन्हें स्वयं के स्तर पर खरीदना पड़ रहा है। बाहरी व्यक्तियों की स्क्रीनिंग व होम आइसोलेशन जैसे कार्य करने के दौरान शिक्षक जोखिम का सामना भी करते है, बावजूद इसके शिक्षकों को मास्क, हैण्ड सेनिटाइजर तक प्रशासन द्वारा उपलब्ध नहीं करवाये जा रहें है, यह सब उन्हें स्वयं के स्तर पर खरीदने पड़ रहें है। मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री ने भी कोरोना से निपटने में शिक्षकों के कार्यों का आभार व्यक्त किया है।इतना ही नहीं शिक्षक इन दिनों दोहरी भूमिका निभा रहे हैं एक तरफ तो कोरोना महामारी से बचाव में लगे हुए है, वहीं लंबे समय से स्कूल बंद होने की वजह से विद्यार्थी शिक्षा में कहीं पिछड़ न जाएं इस हेतु वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब, फेसबुक ग्रुप, व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शिक्षण संबंधी कंटेंट विद्यार्थियों व अभिभावकों तक पहुंचा रहे हैं, साथ नवोदय क्रांति परिवार से जुड़े नवाचारी शिक्षक ऑनलाइन लाइव क्लासेज लेकर पढ़ाई भी करवा रहें है। इस क्षेत्र में शिक्षा विभाग का नवाचार स्माइल कार्यक्रम इन दिनों विद्यार्थी हित की महत्वपूर्ण कड़ी बन कर उभर रहा है।इसके तहत व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अभिभावकों तक शिक्षण सामग्री व ट्यूटोरियल विडीयो पहुंचाए जा रहें है, बालकों के कार्यों की वर्कशीटों को ग्रुप के माध्यम से शिक्षक जांच भी रहें है। 
इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि कोरोना महामारी में वॉरियर्स के रूप में लड़ने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भविष्य में जब भी इस महामारी का जिक्र होगा तो इससे बचाव में लगे कर्मवीरों की सूची में शिक्षकों की भूमिका को भी याद रखा जाएगा।
- लेखक मूलाराम माचरा एक शिक्षक हैं और ये उनके निजी विचार है।

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