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राजस्थान के प्रवेश द्वार पर ढाल बनकर खड़े हैं जालोर के कर्मवीर प्रवीण सैन।

राजस्थान के प्रवेश द्वार पर ढाल बनकर खड़े हैं जालोर के कर्मवीर प्रवीण सैन। सिरोही/आबूरोड़। वैश्विक महामारी घोषित हो चुके कोरोना वाय...

राजस्थान के प्रवेश द्वार पर ढाल बनकर खड़े हैं जालोर के कर्मवीर प्रवीण सैन।

सिरोही/आबूरोड़। वैश्विक महामारी घोषित हो चुके कोरोना वायरस के संक्रमण ने दुनियां को इस तरह से हिलाकर रख दिया हैं की इतिहास याद रखेगा आने वाली कई पीढियां इस भयंकर अदृश्य जानलेवा बीमारी को शायद ही भूल पाएगी। भारत भी देश मे इस संक्रमण को रोकने के लिए हर तरह की कोशिश में लगा है। इसी के चलते 22 मार्च से अब तक देशभर में लगातार लॉक डाउन के चलते अवाम थमी हुई नजर आ रही। इन सबके बीच संक्रमण की चैन तोड़ने में शासन प्रशासन, चिकित्सा विभाग, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग, रक्षा विभाग, परिवहन विभाग, एनजीओ, स्वयं सेवी संस्था, संगठन, न जाने कितने ही विभाग के कर्मचारियों की फ़ौज दिनरात ईमानदारी से लगी हुई हैं। आये दिन अलग - अलग पत्र-पत्रिका, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब मीडिया द्वारा कोरोना से लड़ते कर्मवीर यौद्धाओं की जानकारी प्रसारित करते हैं।
आज हम आप सभी पाठकों को रूबरू करवाते हैं ऐसे ही कर्मवीर यौद्धाओं की फौज में जालोर जिले के निवासी पुलिस विभाग में DSP के पद पर प्रवीण सैन राजस्थान के आबूरोड़ में पोस्टेट हैं। सैन बताते हैं कि मावल चेक पोस्ट इसी क्षेत्र में आता हैं और इस समय राजस्थान में अन्य राज्यों से आने वाले प्रवासियों के लिए गुजरात बॉर्डर से सटा हुआ सबसे बड़ा एंटर पॉइंट हैं। इन दिनों प्रवासियों की घर वापसी की तेज हलचल के कारण हर समय मुस्तेद रहना पड़ता हैं। इस प्रवेश द्वार से आने वाले प्रवासियों की जांच करने में घंटों तेज धूप में लगा हुआ रहना पड़ रहा है। सैन बताते हैं कि यहाँ लगे जवान दिन रात ईमानदारी से इस अदृश्य जानलेवा खतरें से खेलते नजऱ आ रहे हैं। इस पोस्ट से गुजरने वाले हर वाहन को सघनता से जांच करके आगे प्रवेश दिया जाता हैं। चूंकि इधर आने वाले ज्यादातर प्रवासी देश के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बन चुके महाराष्ट्र के मुंबई ओर गुजरात के बड़े शहरों अहमदाबाद, सूरत से ही आ रहे हैं इसलिए ख़तरे की संभावना ज्यादा बनी रहती हैं। यहाँ हर एक कर्मचारी अपनी ड्यूटी के 18 से 20 घंटे तैनात रहते हैं। आप यूं समझिए कि सबसे ज्यादा व्यस्त चेक पोस्ट हैं। इस कोरोना की जंग में लगे कई अधिकारी, कर्मचारी महीनों या हफ्तों से अपने परिवार से मिल नहीं पाए हैं। हम सबका एक ही मकसद हैं कि देश में इस संक्रमण से जल्दी राहत मिले।

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