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जन्मदिन पर विशेष: आधुनिक भारत निर्माण के नायक ई- श्रीधरन।

जन्मदिन पर विशेष: आधुनिक भारत निर्माण के नायक ई- श्रीधरन। @नवीन शर्मा मुंबई। हमारे देश भारत में जहां अधिकतर लोग समय की कीमत न...

जन्मदिन पर विशेष: आधुनिक भारत निर्माण के नायक ई- श्रीधरन।

@नवीन शर्मा
मुंबई। हमारे देश भारत में जहां अधिकतर लोग समय की कीमत नहीं समझते हैं वहां ई श्रीधरन जैसे समय के पाबंद लोग अजूबा ही हैं। हमारे यहां सरकारी योजनाओं में वर्षों की देरी होना आम बात है। ऐसे में श्रीधरन एक नया मानदंड स्थापित करते हैं। 
आधुनिक भारत में रेलवे के विकास में जिस एक शख्स ने सबसे उल्लेखनीय काम किया है वो ई श्रीधरन हैं।
उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट लाजवाब ढंग से तय समय से पहले पूरे किए हैं। उन्होंने भारतीय लोगों की लंबी दूरी की यात्राओं को नई उड़ान दी है। श्रीधरन की कामयाबी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है उनकी ईमानदारी है। उनका मानना है कि काम केवल समय पर पूरा होना ही काफी नहीं है, बल्कि वह स्तरीय भी होना चाहिए और इसके लिए ईमानदारी बहुत जरूरी है, तभी पूर्ण रूप से सफलता मिलेगी। वह कहते हैं, ‘हम पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के मामले में कभी समझौता नहीं करते।’

ई. श्रीधरन का जन्म 12 जून 1932 को केरल के पलक्कड़ में पत्ताम्बी में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पलक्कड़ के ‘बेसल इवैंजेलिकल मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल’ से हुई। इसके बाद उन्होंने पालघाट के विक्टोरिया कॉलेज में दाखिला लिया। आन्ध्र प्रदेश के काकीनाडा के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज’ से ‘सिविल इंजीनियरिंग’ में डिग्री ली।

समय के पाबंद 
ई श्रीधरन ने बहुत कम समय के भीतर दिल्ली मेट्रो के निर्माण का कार्य किसी सपने की तरह बेहद कुशलता और श्रेष्ठता के साथ पूरा कर दिखाया है। श्रीधरन की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत है एक निश्चित योजना के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर काम को पूरा कर दिखाना। समय के बिलकुल पाबंद श्रीधरन की इसी कार्यशैली ने भारत में सार्वजनिक परिवहन को चेहरा ही बदल दिया।

90 दिन का काम 45 दिनों में 
1963 में रामेश्वरम और तमिलनाडु को आपस में जोड़ने वाला पम्बन पुल टूट गया था। रेलवे ने उसके पुननिर्माण के लिए पहले छह महीन का लक्ष्य तय किया था। लेकिन उस क्षेत्र के इंजार्च ने यह अवधि तीन महीने कर दी और जिम्मेदारी श्रीधरन को सौंपी गई। श्रीधरन ने मात्र 45 दिनों के भीतर काम करके दिखा दिया।

कोंकण रेलवे का एक माइलस्टोन 
भारत की पहली सर्वाधिक आधुनिक रेलवे सेवा कोंकण रेलवे के पीछे ईश्रीधरन का प्रखर मस्तिष्क, योजना और कार्यप्रणाली रही है। कोंकण रेलवे बेहद कठिन प्रोजेक्ट था। यह रेल लाइन पश्चिमी घाट के पहाड़ी इलाकों में बनाई गई हैं। इसमें दर्जनों पुल और सुरंगों का निर्माण किया गया है।

भारत की पहली मेट्रो सेवा का निर्माण
भारत की पहली मेट्रो सेवा कोलकाता मेट्रो की योजना भी उन्हीं की देन है। आधुनिकता के पहियों पर भारत को चलाने वाले श्रीधरन को टाइम पत्रिका ने तो उन्हें 2003 में एशिया का हीरो बना दिया। श्रीधरन का कहना है, ‘हम इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि केवल सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही काफी नहीं है। पारदर्शिता, कार्यक्षमता, जवाबदेही, सर्विस-ओरिएंटेशन और सभी घटकों की सहभागिता भी उतनी ही महवपूर्ण है।’ इस बात को वह सिर्फ कहते ही नहीं, अमल में भी लाते हैं। उन्होंने अब तक के अपने सभी प्रोजेक्टों में उससे जुड़े सभी पक्षों की सहभागिता को सुनिश्चित किया है और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित किया है। यह भी उनकी कामयाबी का एक महत्त्वपूर्ण सूत्र है।

दिल्ली मेट्रो को भी बखूबी मंजिल तक पहुंचाया
श्रीधरन काम करने वालों की पेशेवर योग्यता को लेकर कोई समझौता नहीं करते, लिहाजा उनके द्वारा हाथ में लिया गया कोई भी प्रोजेक्ट असफल या कम गुणवत्ता वाला साबित नहीं हुआ। जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिलाया। उन्होंने दिल्ली मेट्रो के निर्माण कार्य में लगे लोगों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए विदेश भी भेजा, क्योंकि उनका मानना है कि किसी भी काम की सफलता अंतत: उसे करने वाले लोगों की योग्यता पर ही निर्भर करती है।

एक व्याख्याता के रूप में करियर शुरू किया 
श्रीधरन ने थोड़े समय के लिए, सरकारी पॉलिटेकनिक, कोझीकोड में सिविल इंजीनियरिंग में एक प्राध्यापक के रूप में काम किया वह बाद में भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (आईईएस) में 1953 में चुने गए। उनकी पहली पोस्टिंग दक्षिणी रेलवे में दिसंबर 1954 में प्रोबेशरीरी सहायक अभियंता के रूप में थी। 

सम्मान व पुरस्कार 
  • 2001 - पद्म श्री
  • 2003 टाइम पत्रिका द्वारा ‘ओने ऑफ़ एसिआज हीरोज’
  • 2008 - पद्म विभूषण
  •  2013 - जापान का राष्ट्रीय सम्मान - ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन- गोल्ड एंड सिल्वर स्टार

श्रीधरन को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने उन्हें तीन वर्षों की अवधि के लिए निरंतर परिवहन (एचएलएजी-एसटी) पर संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय सलाहकार समूह पर काम करने के लिए चुना था।

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