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असहाय गोवंश का सहारा बनी गौपुत्र सेना, एंबुलेंस के लिए लोगों से मांग रही सहारा।

असहाय गोवंश का सहारा बनी गौपुत्र सेना, एंबुलेंस के लिए लोगों से मांग रही सहारा। झालावाड़/अकलेरा। असहाय गोवंश के लिए सहारा बनी गौ...

असहाय गोवंश का सहारा बनी गौपुत्र सेना, एंबुलेंस के लिए लोगों से मांग रही सहारा।

झालावाड़/अकलेरा। असहाय गोवंश के लिए सहारा बनी गौ पुत्र सेना घाटोली अब एंबुलेंस के लिए लोगों से सहारा मांग रही है। लेकिन लोगों की ओर से सहायता नहीं मिलने पर गौ पुत्र सेना तहसील अध्यक्ष केशव बाबा ने मीडिया के माध्यम से लोगों से जन सहयोग करने की अपेक्षा जताई। केशव बाबा ने बताया कि सूचना मिलते ही साथियों के साथ पहुंचकर गाय का उपचार करते हैं। लेकिन कई बार उपचार के लिए गाय को अस्थाई रूप से बनाए गए गौ पुत्र सेना हॉस्पिटल में लेकर आना होता है। वहीं कई बार गायों को जिला अस्पताल के लिए भी ले जाना होता है। ऐसे में चार पहिया वाहन की कमी गौ सेवा में अड़चन बनी हुई हैं।

लोडिंग वाहन से लाते है हॉस्पिटल, आए दिन देने पड़ रहे 2 से 3 हजार रुपए:
केशव बाबा ने बताया कि हाल ही में बैरागढ़ और गेहूंखेड़ी से गोवंश को लेकर आए। गेहूंखेड़ी में गाय की रीड की हड्डी टूट गई और बैरागढ़ में एक नंदी की आंख फूट गई। ऐसे में रक्तदाता समूह कोऑर्डिनेटर व सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत पोसवाल, कमलेश सेन और दिनेश वर्मा के साथ लोडिंग वाहन से गौवंश को घाटोली लेकर आए। जिसके लोडिंग वाहन चालक को 2 हजार रुपए दिए। ऐसा आए दिन होता रहता है क्योंकि अधिकतर गोवंश का उपचार करने के बाद गोवंश की देखरेख करने वाला कोई नहीं मिलता। इसलिए उसका उपचार और देखरेख करने के लिए अस्पताल में ही लेकर आते हैं। गोवंश को लाने के लिए लोडिंग वाहन चालक को आए दिन 2 से 3 हजार रुपए देने पड़ रहे हैं।


2014 से कर रहे गोवंश की सेवा:
गौ पुत्र सेना के केशव बाबा ने बताया कि 2014 से सर्दी, गर्मी, बरसात में 24 घंटे गोवंश की सेवा के लिए तत्पर हैं। लोग सेवा की सराहना तो करते हैं लेकिन सहयोग नहीं मिल पा रहा है। 40 से 45 किलोमीटर दूर से घायल गोवंश को लाते हैं। इसलिए चार पहिया वाहन की काफी जरूरत हैं। लेकिन इसके लिए कोई मदद नहीं मिल पा रही है। यदि मदद मिल जाए तो सेवा का सिलसिला और भी परवान पर पहुंचेगा।

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