Page Nav

SHOW

Breaking News:

latest

सुमेर में प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना कार्य सर्वेक्षण तक सीमित।

सुमेर में प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना कार्य सर्वेक्षण तक सीमित। यह काल्पनिक चित्र हैं पाली। अरावली की गोद में आदिवासी बह...

सुमेर में प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना कार्य सर्वेक्षण तक सीमित।
यह काल्पनिक चित्र हैं

पाली। अरावली की गोद में आदिवासी बहुल पाली जिले की दुआरिया नदी पर प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना 55 वर्षों के बाद भी अब तक सर्वेक्षण स्तर तक ही सीमित हैं। जबकि इस दौरान इसकी प्रस्तावित लागत 15 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में 175.81 करोड़ रूपए से भी अधिक हो गई होगी।

प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना के सर्वेक्षण का कार्य राजस्थान शासन के 2 अक्टूबर 1964 के आदेश के तहत प्रारंभ हुआ था, और इसके सर्वेक्षण कार्य पर राज्य शासन अब तक सवा करोड़ रूपए से अधिक ख़र्च कर चुका हैं। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह परियोजना गत 55 वर्षों से लंबित हैं। परियोजना के अनुसार राज्य शासन द्वारा दुआरिया बांध परियोजना को प्राथमिकता नहीं देने के कारण ही केंद्रीय जल आयोग द्वारा इस परियोजना की तकनीकी स्वीकृति तक नहीं मिल पायी हैं, जबकि स्वीकृति मिलने के बाद भी इस परियोजना में लगभग दस वर्ष लगेंगे।

सूत्रों ने बताया की केंद्रीय जल आयोग को राज्य शासन द्वारा भेजे गए प्रतिवेदनों में परियोजना की लागत का प्राथमिक आकलन जून 1977 को 31.75 करोड़ रूपये, 1988 में 62.88 करोड़ रुपये, 1995 में 120.30 करोड़ रूपये था और अंतिम आकलन 2001 में इसकी लागत 175.81 करोड़ रुपये आंकी गयी थी। दुआरिया बांध परियोजना के लिए जहां केंद्रीय जल आयोग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सफलता नहीं मिली हैं वहीं वन विभाग एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी इसके स्वीकृति प्राप्त करना अधर में लटका हुआ हैं।

स्थानीय किसानों का कहना हैं की साल दो साल में एक बार अकाल से पीड़ित इस इलाक़े में जब भी बारिश होती हैं तो जंगल का पानी बाढ़ की तरह सब कुछ बहाकर ले जाता हैं। जो पानी बिजली पैदा करने की क्षमता रखता हैं वह अपने तेज़ से पहाड़ के पत्थरों को रेत के कण में बदलते हुए रेगिस्तान को बढ़ावा दे रहा हैं। बारिश के पानी को पहाड़ो के पोखरों में रोक कर रखने से समतल इलाक़ों के दूर तक हज़ारों-लाखों कुओं का जल स्तर बढ़ सकता हैं। पचास साल पहले निचले गांवो में जिन कुओं का जल स्तर चालीस-पचास फ़ीट पर रहता था उन्ही कुओं का जल स्तर आज दो सौ से ढाई सौ फ़ीट तक गहरा हो चुका हैं। भूजल विज्ञान के जानकारों का यह मानना हैं कि जंगल के उंचे पहाड़ों में पानी का भराव बारों मास बने रहने से नीचले स्तर के गांवो में सेक़ड़ो किलोमीटर दूर के तमाम कुओं का जल स्तर बढ़ जाना स्वभाविक हैं।
यह काल्पनिक चित्र हैं

पाली जिला मुख्यालय से साठ कि.मी. और देसूरी पंचायत समिति से मात्र दस कि.मी. दूर सुमेर में प्रस्तावित दुआरिया बांध परियोजना के पक्के बांध की ऊंचाई 45 मीटर हैं और कुल लंबाई 285.61 मीटर हैं। इस परियोजना से पाली जिले की 85 हज़ार एकड़ और जोधपुर विभाग की लगभग पांच सौ एकड़ से भी अधिक भूमि को वार्षिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होना प्रस्तावित हैं।


मुंबई के प्रवासी राजस्थानी समाज ने कोरोना काल लॉकडाउन रोज़गार राहत कार्यो के तहत इस बांध को तत्काल बनवाने की मांग की हैं। देसूरी तहसील मुख्यालय के क़रीब सुमेर गांव के उपर दो पहाड़ियों के बीच प्रस्तावित इस बांध के प्रति प्रवासी अब जागृत हो गए हैं। दो प्राकृतिक पहाड़ियों के बीच के इस संगम को दुआरिया के नाम से ही जाना जाता हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुंबई के प्रवासियों ने मांग की हैं कि इस बांध का निर्माण कार्य जल्दी शुरू कराया जाए। पिछले बीस वर्षों से प्रयासरत मुंबई का प्रवासी राजस्थानी समाज अब इस बांध के निर्माण को लेकर जन आंदोलन करने की तैयारीयों के साथ एकजुट हो रहा हैं।
— भरतकुमार सोलंकी (वित्त विशेषज्ञ, मुंबई)


कोई टिप्पणी नहीं