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केंद्र सरकार के बंदरो को मारने के आदेश को निरस्त करने की मांग।

केंद्र सरकार के बंदरो को मारने के आदेश को निरस्त करने की मांग। बाड़मेर। केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश में रीसस मकाऊ जाती के ...

केंद्र सरकार के बंदरो को मारने के आदेश को निरस्त करने की मांग।

बाड़मेर। केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश में रीसस मकाऊ जाती के बंदरो को मारने के आदेश देने के विरोध में आज जीवदया मैत्री ग्रुप बाड़मेर की तरफ से राष्ट्रपति के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर राकेश शर्मा को ज्ञापन देकर केंद्र सरकार के आदेश को तुरंत निरस्त करने की मांग की गई। जीव दया मैत्री ग्रुप के संयोजक समाज सेवी एडवोकेट मुकेश जैन ने बताया कि केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले हफ्ते हिमाचल प्रदेश में रीसस मकाऊ जाति के बंदरो को एक साल के लिए विनाशक घोषित करते हुये, हिमालचल के बंदर प्रभावित इलाकों में इन बंदरो को मारने के आदेश हिमाचल सरकार को दिए है। उक्त आदेश एक साल तक प्रभावी रहेगा, जबकि रीसस मकाऊ बंदर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची के तहत संरक्षित प्रजाति है, ऐसे में केंद्र का यह आदेश ना केवल अमानवीय है बल्कि असंवैधानिक भी है, ऐसे में जीव दया मैत्री ग्रुप बाड़मेर ने राष्ट्रपति से उक्त आदेश को रद्द करने की मांग करते हुये, अतिरिक्त जिला कलेक्टर राकेश शर्मा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा। ज्ञापन जीव दया मैत्री ग्रुप के संयोजक समाज सेवी एडवोकेट मुकेश जैन के नेतृत्व में सौपा गया। इस अवसर पर जीव दया ग्रुप के रमेश पारख, गणपत संखलेचा, महावीर इंटरनेशनल सूरत के अध्यक्ष रमेश बोहरा, सचिव गणपत भंसाली, समाज सेवी के.के. कॉमरेड, अधिवक्ता सुरेश सोनी, भवानी शंकर, पुरषोत्तम धारीवाल, मनोज जैन, महावीर सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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