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यह ट्रेन नही स्कूल हैं, बच्चों को आकर्षित करने के लिए शिक्षकों ने दिया नया रुप।

यह ट्रेन नही स्कूल हैं, बच्चों को आकर्षित करने के लिए शिक्षकों ने दिया नया रुप। @जोगाराम चौधरी बाड़मेंर/धोरीमन्ना। स्कूल ...

यह ट्रेन नही स्कूल हैं, बच्चों को आकर्षित करने के लिए शिक्षकों ने दिया नया रुप।

@जोगाराम चौधरी
बाड़मेंर/धोरीमन्ना। स्कूल अगर दिखने में आकर्षक हो तो बच्चों का पढ़ने का प्रति लगाव बढ़ जाता हैं,अगर स्कुल ट्रेन जैसी दिखे तो ऩजारा कुछ और ही नजर आता हैं, ऐसा ही एक विधालय भीमथल ग्राम पंचायत की राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय भीमथल में प्राधानाचार्य रुपसिह जाखड़ व व्याख्याता शंकराराम विश्ऩोई ने भामाशाह के सहयोग से विधालय को ट्रेन जैसा रुप दिया हैं,जिसे ट्रेन की बोगी की तरह सजाया गया है। इसकी पुताई ऐसे ढंग से की है कि दूर से देखने वाले ही हैरान रह जाते हैं। उन्हें लगता है कि ट्रेन की बोगी खड़ी है। जब यहां से छात्र-छात्रा आते-जाते हैं तो पूरी स्थिति समझ में आती है। इस स्कूल के नए स्वरूप को देखने के लिए गांव के लोग भी जुट रहे हैं। अन्य स्कूलों के शिक्षक और बच्चे भी इसे देखने आते हैं।

पर्यावरण, वन्य जीवों की दीवारों पर चित्रकारी
पर्यावरण एवं जीव-जंतुओं के बारे में बाउंड्रीवॉल एवं कमरों मे आकर्षक चित्रकारी की गई। कमरों में विषय आधारित पेंटिंग है। इससे कक्ष और परिसर आकर्षक दिखाई देता है।


स्कूल काे अंदर से भी सजाया गया
विद्यालय को अंदर से भी सजाया गया है। विद्यालय के प्रधानाचार्य रुपसिह जाखड़ व व्याख्याता शंकराराम विश्ऩोई का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में रूढ़िवादी पद्धति से हटकर नवाचार रूपी जाे गतिविधियां की जा रही हैं उससे शिक्षा पद्धति में काफी बदलाव आए।

भामाशाहो के रुप में सेवानिवृत्त शिक्षको ने दिया नया रुप
भीमथल ग्राम के सेवानिवृत्ति शिक्षको ने भामाशाहो के रुप में विधालय का रुप निखार रहे हैं सेवानिवृत्त व्याख्याता नेमाराम विश्नोई व अध्यापक सुजाणाराम ने भामाशाह के रुप में विधालय का रंगाई व ट्रेन का नया रुप अपने पैसे से करवाकर नया रुप दिया!

इनका कहना हैं

हमारे विधालय की पुरी टीम के अलावा भीमथल में भामाशाह हमेशा तत्पर रहते हैं विधालय में हर छोटी मोटी गतिविधियां या कार्य में गहरी मंशा रखते हैं।
- रुपसिह जाखड़ प्रधानाचार्य भीमथल

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