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पिण्डवाड़ा के कारखानो को चालू कर काम देने की मांग को लेकर मजदूरों ने की वार्ता।

पिण्डवाड़ा के कारखानो को चालू कर काम देने की मांग को लेकर मजदूरों ने की वार्ता। श्रमिकों की वार्ता के दौरान उपस्थित अधिकारीगण एवं अन...

पिण्डवाड़ा के कारखानो को चालू कर काम देने की मांग को लेकर मजदूरों ने की वार्ता।
श्रमिकों की वार्ता के दौरान उपस्थित अधिकारीगण एवं अन्य लोग।

@मुकेश पाल सिंह
सिरोही/पिण्डवाड़ा। गुरुवार को स्थानीय पंचायत समिति पिण्डवाड़ा के सभा भवन में संभागीय संयुक्त श्रम आयुक्त जी.वी. व उपखण्ड अधिकारी हरी सिंह देवल की मध्यस्थता में हाल ही में नियोक्ता द्वारा बंद किय गए पत्थर घड़ाई के कारखानों को वापस चालू करवाकर काम दिलाने की मांग को लेकर श्रमिको और नियोक्ता के साथ वार्ता की गई। ज्ञातव्य है कि सरूपगंज और झाड़ोंली में डीवाइन स्टोन इंटरप्राइजेज द्वारा 1 जुलाई से अचानक पत्थर घड़ाई के कारखानों को बंद कर सैकड़ो श्रमिको को यहां से 250 कि.मी. दूर सागवाड़ा (डूंगरपुर) जाने का फरमान जारी कर दिया गया था, जो श्रमिक वहा जाने के लिए राजी नहीं है, उनसे इस्तीफे मांगे जा रहे है। नियोक्ता पक्ष डीवाइन स्टोन इंटरप्राइजेज द्वरा बिना किसी पूर्व सुचना और चर्चा के 29 जून की शाम को अचानक इस आशय का नोटिस अपने सरूपगंज और झाड़ोंली स्तिथ कारखानों पर चस्पा कर 1 जुलाई से काम पर आने से मना कर दिया गया। इस पर श्रमिको ने सामूहिक रूप से पत्थर घड़ाई मजदूर सुरक्षा संघ के मार्फत ट्रांसफर की आड़ में की जाने वाली इस अवैध बंदी के विरोध में श्रम सचिव, जिला कलेक्टर और श्रम कल्याण अधिकारी के समक्ष इन बंद कारखानों को पुन: चालू कर नियमित रोजगार दिए जाने को लेकर प्रार्थना पत्र दिया गया था। श्रम विभाग द्वारा इस मामले में आज एक त्रिपक्षी वार्ता का आयोजन किया गया। संयुक्त श्रम आयुक्त की मध्यस्थता और उपखंड अधिकारी व श्रम कल्याण अधिकारी की उपस्तिथि में हुई इस वार्ता में पत्थर घड़ाई सुरक्षा संघ की और से मजदूरों ने ट्रान्सफर की आड़ में की जाने वाली इस अवैध व अप्रत्यक्ष बंदी को औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत पूरी तरह से गैर कानूनी और इस कोरोना महामारी के दौर में श्रमिको को अवैध सेवा समाप्ति का शिकार व प्रताडि़त करने वाली कार्यवाही बताया। नियमानुसार नियोक्ता द्वारा किसी भी कारखाने या इकाई को बंद करने से 90 दिन पूर्व सूचना और बंद करने का स्पष्ट कारण बताते हुए सरकार से अनुमति लिए जाने का प्रावधान है। इस मामले में नियोक्ता पक्ष द्वारा किसी भी प्रकार की पूर्व सुचना या सरकार से अनुमति नहीं ली गई। सभी मजदूर चाहते है कि उन्हें यही पर काम मिले और ये कारखाने चलते रहे। नियोक्ता पक्ष डीवाइन स्टोन इंटरप्राइजेज द्वारा बार बार यहां कारखाना नहीं चलाने और इस बंदी को ट्रांन्सफर ही मानने की बात कही जाती रही। नियोक्ता पक्ष द्वारा समझोते और पुन: अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय मांगने पर संभागीय श्रम आयुक्त द्वारा कानूनी पक्ष के मद्देनजर दोनों पक्षों को 16 जुलाई को पुन: वार्ता के लिए बुलाया गया। जबकि नियोक्ता हर्षद चावड़ा ने माल के अभाव में कारखाना पुन: चालु करने में असमर्थता प्रकट की तथा श्रमिकों के ट्रांसपोर्ट को उचित बताया। इस अवसर पर कारखाना मालिक हर्षद चावड़ा, किरण राजपुरोहित, अजीत सिंह राठौड़, मदनलाल मेघवाल, शंकर हिरागर, शंकरलाल मेघवाल, सकाराम गरासिया, भावेक पेटल सहित अन्य लोंग उपस्थित थें।
वार्ता के दौरान बाहर खड़े श्रमिक।


सोशल डिस्टेटिंग की उड़ाई धज्जियां  
पत्थर घड़ाई, नियोक्ता व प्रशासन के बीच में वार्ता गुरूवार को आयोजित की गई, लेकिन कोविड़-19 के तहत निर्देशो के बावजुद भी श्रमिकों से सोशल डिस्टेटिंग की धज्जियां उड़ाई। 

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