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मालाणी रेल को सप्ताह में तीन दिन नहीं चलाने का निर्णय गलत, किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे: राठौड़

मालाणी रेल को सप्ताह में तीन दिन नहीं चलाने का निर्णय गलत, किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे: राठौड़ बाड़मेर। कांग्रेस पार्ट...

मालाणी रेल को सप्ताह में तीन दिन नहीं चलाने का निर्णय गलत, किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे: राठौड़

बाड़मेर। कांग्रेस पार्टी के युवा नेता एवं मालाणी बचाओं संघर्ष समिति के संयोजक आजाद सिंह राठौड़ ने बताया की केन्द्र सरकार ने मालाणी रेल को आने वाले दिनों में सप्ताह में मात्र 3 दिन चलाने की घोषणा की है, जो की सरासर गलत है।

राठौड़ ने बताया कि अभी कुछ माह पहले ही जब मालाणी एक्सप्रेस को बन्द करने का निर्णय लिया गया था तब हर आयु वर्ग के लोग, सभी धर्मो के लोग और छतीस कौम के लोगों ने हमारा हौंसला बढ़ाया और चौथे स्तम्भ ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिस कारण रेल मंत्रालय को अपना निर्णय बदलना पड़ा था। अब अचानक से कोरोना काल की आड़ लेकर बाड़मेर की जनता पर यह कुठाराघात एक बहुत बड़ा धोखा है। बाड़मेर-जैसलमेर क्षेत्र से बारी बारी, अलग अलग दिन में एक ही ट्रेन दिल्ली जायेगी जैसी नीति समझ से परे है। बाड़मेर व जैसलमेर दोनो ज़िले आज सामरिक, पर्यटन व औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। बजाय बंदरबाट के  दोनो ज़िलों को लम्बी दुरी की ट्रेनें दी जानी चाहिये। बाड़मेर में रेल मार्ग पर बाड़मेर जिला मुख्यालय एवं बालोतरा शहर के साथ ही एयर फोर्स, आर्मी क्षेत्र आते है तथा बाड़मेर में तेल खोज एवं उत्पादन का सबसे बड़ा क्षेत्र स्थित है एवं रिफाइनरी भी यहां स्थापित हो रही है। इसलिये यहां देश के हर कौने से लोग कार्य कर रहे है जिसके लिए आवागमन का सुगम साधन रेल है एवं सबसे उपयुक्त मार्ग भी बाड़मेर-जयपुर-दिल्ली है। जो लोग प्रतिदिन जोधपुर, बालोतरा, बायतु से बाड़मेर अपने काम पर आते है, उनके लिए इसके बाद फिर कोई तेज गति की ट्रेन नहीं बचती है।
मालाणी एक्सप्रेस यहाँ के मुसाफिरों के लिए एकदम उपयुक्त है। बाड़मेर सेना के लिहाज से, तेल-गैस क्षेत्र के लिहाज से या यूं कहना लाजमी होगा कि हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी के कामों के लिहाज से एक ऐसी रेल सेवा जो हमें सुलभ मुहैया है, इससे सप्ताह में तीन दिन नहीं चलाने का निर्णय आखिर किस आधार पर किया। क्या कोई सर्वे करवाया गया ? यहि हाँ तो उसे जनता के सामने रखा जाए। क्या सरकार बता सकती है कि एक ऐसा फैसला लेने का कदम क्यों उठाया गया।
बाड़मेर मालाणी क्षेत्र केन्द्र सरकार को अपने खनिज खजाने से भरपूर आमदनी दे रहा है। क्या काला सोना व खनिज सम्पदा उगलने वाली इस धरा के साथ केन्द्र सरकार द्वारा ऐसा अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिये है ?

राठौड़ ने बताया की केन्द्र सरकार के इस गलत फैसले का विरोध हम बाड़मेर के लोग ही नहीं बल्कि जैसलमेर के भी सभी निवासी विरोध करते है, अगर रेल मंत्रालय फ़ैसले को दूरस्त नहीं करती है तो पहले की भाँति ही आंदोलन चला उसे फ़ैसला बदलने व जनता की माँग के आगे नतमस्तक होने पर मजबूर किया जायेगा। - आज़ाद सिंह राठौड़, बाड़मेर

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