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योग वेदांत सेवा समिति के साधकों द्वारा चतुर्मास में किया जा रहा है जप तप यज्ञ।

योग वेदांत सेवा समिति के साधकों द्वारा चतुर्मास में किया जा रहा है जप तप यज्ञ। श्री नागणेची माता मठ मंदिर में चातुर्मास आरंभ। ...

योग वेदांत सेवा समिति के साधकों द्वारा चतुर्मास में किया जा रहा है जप तप यज्ञ।

श्री नागणेची माता मठ मंदिर में चातुर्मास आरंभ।
बाड़मेर/सिणधरी। कोरोना संक्रमण काल के चलते इस वर्ष हिन्दू धर्मावलंबी सहित जैन समाज के चातुर्मास पर भी असर पड़ा है। इस वर्ष अधिमास होने से चातुर्मास पांच महीने का होगा। इसका समापन नवंबर में होगा। ऐसा पहली बार हो रहा है कि चातुर्मास में साधु-संतों का प्रवास नहीं होगा।

ये होंगे कार्यक्रम
चार जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत हो गई है। पांच जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई गई है। तीन अगस्त को रक्षाबंधन, एक सितंबर को अनंत चतुर्दशी व्रत, 30 अगस्त से दो सितंबर तक सत्नत्रय पर्व, तीन सितंबर को क्षमावाणी पर्व, 31 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, 15 नवंबर को महावीर निर्वाण का पूजन किया जाएगा।
इस बीच साधकों द्वारा घरों में रहकर ही तपस्या की जा रही है। सुबह साधु संतों द्वारा अपने गुरु व इष्ट देव के सामने बैठकर दीप जलाकर कलश की स्थापना के बाद विधि विधान से पूजा की जा रही है। जाप के साथ हवन भी किया जा रहा है। शाम को आरती की जाती है। योग वेदांत सेवा समिति के तहसील अध्यक्ष विजय भाई प्रजापति ने बताया कि मठों मंदिरों सहित योग वेदांत सेवा समिति परिवार के साधकों द्वारा चातुर्मास के दौरान जप तप ध्यान भजन साधना परिवार के साथ पवित्र वातावरण बना हुआ है कई साधकों द्वारा दिन में एक बार घर का बना हुआ शुद्ध भोजन किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यूट्यूब के माध्यम से सत्संग व प्रवचन की ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। जिसके द्वारा साधक परिवार घर बैठे प्रवचन सुन सकें।

चातुर्मास का महत्व
नागणेची माता मठ के महंत शिवानंदगिरी महाराज ने कहा कि साधु संतों की साधना का पर्व है चातुर्मास। इन महीनों में साधु संत साधना में लीन रहते हैं। अधिमास होने के कारण इस बार एक महीने अधिक साधना की जाएगी। इस बीच पड़ने वाले पर्वों को शारीरिक दूरी के साथ मनाए जाएंगे।

कोरोना के संक्रमण को देखते हुए आयोजनों को कई समितियों द्वारा किया जा रहा है। घर पर रहकर ही पूजा अर्चना की जाएगी। मंदिरों में शारीरिक दूरी के साथ दर्शन हो सकेंगे। अधिक मास होने के कारण चातुर्मास पांच महीने का होगा। घरों में ही रहकर तपस्या व अन्य पूजा कार्यक्रम जारी रहेंगे। कोरोना को देखते हुए नियमों का पालन करना चाहिए।

इस बार कोरोना संक्रमण के कारण सामाजिक कार्यक्रमों पर भी असर पड़ेगा। घरों में ही पूजा व अन्य कार्यक्रम होंगे। इस दौरान विजय भाई प्रजापत चाडो की ढ़ाणी, तुलसाराम बांगड़वा, अर्जुन देवासी, चोंपाराम लोहार, सहित कई साधक मौजूद रहे।

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