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अधिकृत समाचार बैनर ही आपकी खबर के लिए सही मंच हैं: नारायण बारहट

अधिकृत समाचार बैनर ही आपकी खबर के लिए सही मंच हैं: नारायण बारहट @राजू चारण  खराब + बद्द + रण = खबर.....  जहां हालात खरा...

अधिकृत समाचार बैनर ही आपकी खबर के लिए सही मंच हैं: नारायण बारहट

@राजू चारण 
खराब + बद्द + रण = खबर..... 
जहां हालात खराब हो, हालात को सुधारने की नियति बद्द हो, और हालात को काबू में लाने के लिए सदैव राजा प्रजा के मध्य अनन्तकाल से रण चलता रहे। वहां सदैव नए विश्वास का संचार करने के लिए खबरनवीस का आहवान होता रहा है। वैसे तो बाड़मेर की भूमि पर अनेको खबरनवीसों ने बाड़मेर की प्रजा को न्याय दिलवाने में अपनी अग्रणी भूमिका अदा की है। डाॅ. केसरीमल केसरी, भूरचंद जैन, शंकरलाल गोली, भैरसिंह सोढ़ा, महेन्द्र जांगिड़, एस कुमार मथरानी, अमरलाल फोटोग्राफर, महावीर जैन, धर्मसिंह भाटी, गौतम जैन, दिनेश बोथरा, मदन बारूपाल, पवन जोशी, रतन दवे, शिव प्रकाश सोनी, सरीखे अनेको खबरनवीसों ने बाड़मेर और बाड़मेर की प्रजा की हर खबर को अपनी कलम से एक धार देकर प्रशासन के सम्मुख रखा हैं। वह दौर भी क्या खूब था जिसकी कलम चलती थी, उसकी खबर का असर मिलता था। तब शायद खबर एक पेड़ था और सारे खबरनवीस उस पेड़ की जड़े। जो स्वयं आपस में उलझे पेड़ की मुख्य शाखा को मजबूती और पेड़ की हरियाली से पत्रकारिता की सुखद छांव में बाड़मेर की जनता को राहत का फल प्रदान करवाते थे।

लेकिन अब वो बात कहां ? 
अब खबरनवीस नही, खबरे नही, अब तो बस केकड़ा संस्कृति रह गई हैं। व्हाटसअप युनिवर्सिटी से डिग्री लेकर नए दौर के जो माफिया आए हैं। सबने अपने अपने ईलाके बांट लिए है। सबके पास अपने अपने व्हाटसअप ग्रुप है, यूटयूब चैनल है, सोशल पेज हैं। जनता की पुकार हो या नेता मंत्री की राहत भरी बात हो, सबको खबर बनने से पहले ही सोशल ईलाकें में घेर लिया जाता है। और वह पुकार, वह बात समाचार पत्रों और वास्तविक समाचार चैनलों तक पहूंचने से पहले ही सोशल माफिया की बलिवेदी पर छटपटाकर दम तोड़ देती है। वीवर कितने बढ़े इसी को टारगेट करके हर खबर का अपहरण कर लिया जाता है। इससे ऐसा प्रतीत होता हैं जैसे प्रजा, नेता, मंत्री, अधिकारी सभी सोशल माफिया से कही न कही दबे हुए है, सबकी दुखती रग सोशल माफिया के पास हो। महाभारत का वह दृष्य आज की परिदशा बन चुका हैं। जिसमें जुए में हारे पाण्डवों की भांति नेता मंत्री प्रशासन सभी हारे हुए मूकदर्शक बनकर, जनता की जरूरत की खबरों को और नेता-मंत्री अधिकारीयों की न्यायसमत बात को जनता तक पहूंचाने के बीच की कड़ी जिसे कानूनन खबर कहा गया हैं, इस खबर का चीरहरण होते देखते रहते हैं। गीता ज्ञान के अनुसार वास्तविक चीर हरण खबर का नही हो रहा हैं, चीर हरण तो नेता, मंत्री, प्रशासन के वजूद का हो रहा हैं। क्योंकि अगर यही हालात रहे तो महाभारत के चीरहरण के बाद जो महाभारत हुआ वही महाभारत वर्तमान में जनता के खबरों के अधिकार हनन के कारण होगा। जनता जिस दिन समझ गई कि भारत का संविधान, भारत का कानून, भारत की प्रशासनिक कार्यशैली, अधिकारी, मंत्री, सरकार की जवाबदेही सोशल मिडिया की खबरों के प्रति प्रमाणिक नही हैं, तब जनता का गदर सरकार को झेलना होगा। 

सोशल मिडिया पर लिखी गई पोस्ट, अफवाह और काॅपी पेस्ट भी होती है। आज भी हजारों पोस्ट ऐसी हैं जो बरसो पुरानी होने के बावजूद सोशल मिडिया पर आज भी काॅपी पेस्ट हो रही है। कभी बेल से भरा ट्रक आ रहा है, कभी हाईवे पर भीषण एक्सीडेंट हुआ हैं, कभी शराब के कंटेनर आ रहे है। कभी आपसी झगड़े, कभी पिटाई के विडियों यह कहकर पोस्ट कर दिए जाते हैं कि यह अभी अभी हुआ है...। और कमाल देखो, इतनी भ्रामक्ता फैलाने के बावजूद इन सोशल माफिया के खिलाफ भारत में कोई कानून इनको रोक नही पा रहा है। बड़े बड़े नेता-मंत्री आधे आधे घंटे के वाॅक थ्रो करवाते देखे जाते है। अधिकारी भी लम्बी लम्बी बाईट देते देखे जाते है। जनता भी अपनी समस्याओं का दुखड़ा सुनाते देखी जाती हैं। किन्तु आज दिन तक इन किसी समाचार चेनल पर इन वाॅक थ्रो, बाईट को नहीं दिखाया जाता हैं, अगर दिखाया जाता हैं तो वह सिर्फ यूटयूब और व्हाटसअप पर। जानते हो क्यों ? क्योंकि किसी भी समाचार चैनल पर खबर को एक डेड मिनट से ज्यादा नही दिखाया जाता। फिर आप जनता, अधिकारी, नेता, मंत्री किस गलतफहमी में रहकर घंटों तक बाईट वाॅक थ्रो करवाते हैं वो भी एक झूमके सरीके छोटे से काॅलर माईक पर, और सोशल मिडिया के लोगो लगे माईक पर। या यूं कहे कि आप नेता मंत्री अधिकारीयों को वास्तविक समाचार चैनल पर कोई स्थान नही मिलता जो आप अपनी मन की इच्छा पुरी करने के लिए सोशल माफिया की शरण में आकर अपनी पहचान बचाने की कोशिश करते रहते है, जो आपका वास्तविक कर्म और धर्म कदापि नही है। फिर क्यों ? 


फिर वही बात,,, कड़वी है किन्तु सच हैं,,, आपकी बात सरकार तक पहूंचे और सरकार की बात आप तक पहूंचे इसके लिए बीच का एक माध्यम हैं, समाचार। यह समाचार भारत सरकार से अधिकृत समाचार पत्रों और समाचार चैनल में प्रकाशित प्रसारित होने पर तुरंत प्रभाव से सरकार तक पहूंचता हैं और इसे सरकारी विभागों के साथ न्यायपालिका में भी पूरी तवज्जों दी जाती हैं। किन्तु आप अपनी बात सोशल माफियाओं के द्वारा व्हाटसअप यूटयूब फेसबुक आदी पर चलवाकर प्रशासन की तरफ देखने लगते हो कि कब कार्यवाही होगी,,, अब विचार किजिए,,, जो व्हाटसअप यूटयूब फेसबुक आदि सरकारी विभागों, न्यायपालिका की नजर में जिम्मेदार ही नही हैं, उसकी बात पर वो भला एक्सन क्यों लेंगे ? अधिकारी भी जवाबदार होते हैं। अखबार में छपी हुई खबर और समाचार चैनल पर प्रसारित खबर को प्रशासनिक कार्यवाही के लिए आधार बनाया जाता हैं। किन्तु सोशल मिडिया पर चलने वाली पोस्ट को डिलिट कर देने के बाद प्रसासनिक अधिकारी कार्यवाही की वजह किसे बताऐंगे। अधिकारी अपने उच्चस्थ अधिकारी को क्या जवाब देंगे कि अभी तो पोस्ट चल रही थी, अब पता नही कहां चली गई, शायद डिलिट हो गई,,, इस जवाब पर अधिकारी की नौकरी नही जाएगी,,,? आप जब इतना समझते जानते हैं तो सोशल मिडिया पर अपनी समस्या का बखान करवाने के बाद कार्यवाही की उम्मीद क्यों करते हो। आप जनता जनार्दन हैं आपको आपकी शिकायत आपकी बात सरकार तक पहूंचाने के लिए सदैव भारत सरकार सरकार से अधिकृत समाचार पत्रों और समाचार चैनलो पर ही प्रसारित करवानी चाहिए, तभी आपकी बात सही माध्यम से सही मंच तक पहूंचकर असर के लिए सरकार को प्रभावित करेगी।

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