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बाड़मेर, गोबर को खाद में बदलने एवं जैविक खेती विषयक प्रशिक्षण आयोजित।

बाड़मेर, गोबर को खाद में बदलने एवं जैविक खेती विषयक प्रशिक्षण आयोजित। बाड़मेर। किसानों को जैविक खेती को प्राथमिकता देने की जरूरत है। पशुधन के ...

बाड़मेर, गोबर को खाद में बदलने एवं जैविक खेती विषयक प्रशिक्षण आयोजित।


बाड़मेर। किसानों को जैविक खेती को प्राथमिकता देने की जरूरत है। पशुधन के गोबर को कंपोस्ट खाद में बदलने के साथ जैविक खेती के माध्यम से अच्छी पैदावार ली जा सकती है। काजरी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ.ए.के.शर्मा ने सोमवार को केयर्न सहगल फाउंडेशन की ओर से माडपुरा बरवाला में गोबर को खाद में बदलने एवं जैविक खेती विषयक प्रशिक्षण के दौरान यह बात कही।
इस दौरान मुख्य वैज्ञानिक डॉ.ए.के.शर्मा ने कहा कि बाड़मेर जिले में पशुधन की संख्या करीब 56 लाख है। यह आमजन की आबादी की दुगुनी है। पशुधन से प्रतिदिन 1200 टन गोबर पैदा होता है। लेकिन शुष्क जिला होने के कारण किसान गोबर को सड़ाकर इसकी कंपोस्ट नहीं बना पाते। जो सूखकर हमारी मुद्रा एवं फसलों के लिए हानिकारक साबित होता है। इससे खेतों में दीपक पैदा होती है। मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शर्मा ने कहा कि इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सहगल फाउंडेशन ने केयर्न फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से गोबर को कंपोस्ट खाद में बदलने एवं जैविक खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों को कंपोस्ट खाद बनाने एवं स्थानीय वस्तुओं के उपयोग करते हुए कीटनाशक तैयार करने के बारे में तकनीकी जानकारी दी। इस दौरान सहगल फाउंडेशन के वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक भानुप्रतापसिंह एवं राहुल गुप्ता ने किसानों को उन्नत जैविक खेती के विविध पहलूओं से रूबरू कराया। उन्होंने किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। माडपुरा बरवाला में आयोजित इस प्रशिक्षण में सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए 42 किसानों ने भाग लिया।

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