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पटवारी बना कलेक्टर,12 सौ बीघा जमीन का रिश्तेदारों को बेनामी आवंटन।

पटवारी बना कलेक्टर,12 सौ बीघा जमीन का रिश्तेदारों को बेनामी आवंटन। जैसलमेर। भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले जैसलमेर जिले में आए दिन जमीनों क...

पटवारी बना कलेक्टर,12 सौ बीघा जमीन का रिश्तेदारों को बेनामी आवंटन।


जैसलमेर। भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले जैसलमेर जिले में आए दिन जमीनों के फर्जीवाड़े सामने आ रहे है, बावजूद इसके प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी इन पर नियंत्रण नहीं हो रहा है। जैसलमेर जिले में अब कोई ख़ाली ज़मीन सुरक्षित नही है। भूमाफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। कोई खाली जमीन देखी नहीं, कि भूमाफिया जाकर कब्जा कर लेते हैं, फिर वह किसी की निजी जमीन हो या फिर सरकारी भूमि या गोचर भूमाफियाओं का आतंक हावी है। ऐसा ही एक मामला फतेहगढ़ तहसील में ग्राम फ़तेहसर में सामने आया है, पटवारी अशोक दान ने स्वंय अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाके कलेक्टर के अधिकार स्तर का कारनामा कर दिया। पटवारी अशोक दान द्वारा 75 बीघा जमीन अपने रिस्तेदार के नाम कर दी, वही पटवारी ने फर्जी मियूटेशन भी बनाकर रिकॉर्ड में दर्ज किया। अशोक दान ने फर्जी आरएएस अधिकारी बन अपने रिस्तेदार के नाम, 75 बीघा जमीन कर दी। 75 बीघा जमीन अपने साले के नाम कर दी, जब सरकारी अधिकारी ही फर्जी दस्तावेज बना कर राजस्व को करोडो रुपयों का चूना लगाते नहीं चूकते, पटवारी अशोक दान ने फर्जी सील व स्टाम्प लगा कर 75 बीघा जमीन हड़ंप ली, जिसमें अशोक दान फर्जी तहसीलदार व एसडीओ बनकर सड्यंत्र रचकर न्यायालय राजस्व अपील अधिकारी आरएएस भेराराम के नाम से सिगनेचर कर सरकारी ज़मीन पर फ़र्ज़ी फैसला कर अपने साले के नाम कर दी। व अन्य ऐसी कई जमीनों को पटवारी व तहसील कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज  बनाकर अपने  पक्ष कर ज़मीन को अपने रिस्तेदारो के नाम कर लेता है।
पीड़ित पक्ष गुलाम खान ने बतया की हमारा पूर्वजो का खेत ग्राम देवीकोट में आया है, जिस पर पीडियो से बहैसियत मालिक व् काबिज है। जिसके समरी खसरा संख्या 123 रकबा 57 10 बिस्वा है, यह खेत समरी में भी दर्ज है ,लेकिन अंतिम सेटलमेंट में इसके नवीन खसरा संख्या 674 बने और देवीकोट से एक नया गांव फ़तेहसर बना तब इसके खसरा संख्या 674 बने, जिसको एसडीओ फतेहगढ़ द्वारा इसका फैसला 9 -12 -2014 ल को हमारे पक्ष में कर दिया, गुलाम खान ने बताया की इस्माइल खान व् अशोक दान की मिली भगत से राजस्व की बेशकीमती जमीन को फर्जी तरिके से अपने पक्ष में कर दिया।
और जब भागा बेवा सुरताण व इस्माइल पुत्र सुरताण का दावा एसडीओ न्ययालय द्वारा ख़ारिज कर दिया  गया, तब कुछ भू माफियाओ के गेंग के सदस्यों द्वारा एक साजिश व सडयंत्र रूपी योजना से एसडीओ फतेहगढ़ की मिली भगत से अथवा उनकी फर्जी सील व फर्जी सिगनेचर करवा कर एक कूटचरिता दस्तावेज न्ययालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से तैयार किया गया और उसे  फर्जी फैसले के आधार पर पटवारी  अशोक दान चारण ने फर्जी तरीके से म्यूटेशन संख्या 22 भरा और तहसीलदार फतेहगढ़ भेराराम के फर्जी सील व सिगनेचर कर अपने पक्ष में फैसला कर लिया, पटवारी अशोकदान ने इस म्यूटेशन को स्वीकृत करवाया जो की हाल खसरा  संख्या 665, 674 व 675 का स्वीकृत करवाया, जब की ऐसा कोई फैसला एसडीओ फतेहगढ़ द्वारा करना नहीं बताया गया है, जब फैसला नहीं हुआ तो यह म्यूटेशन कैसे कायम हुआ। अगर प्रशासन इस मामले की छानबीन करता है तो ऐसे कई मामले उजागर होंगे।

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