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आज महिला किसानों के हकों की बात बहुत जरूरी: डॉक्टर सोनाली शर्मा

आज महिला किसानों के हकों की बात बहुत जरूरी: डॉक्टर सोनाली शर्मा बाड़मेर। देश भर में गुरुवार को महिला किसान दिवस मनाया गया। महिला किसानों की ब...

आज महिला किसानों के हकों की बात बहुत जरूरी: डॉक्टर सोनाली शर्मा


बाड़मेर। देश भर में गुरुवार को महिला किसान दिवस मनाया गया। महिला किसानों की बात को विभिन्न आयोजनों के जरिये आगे बढ़ाया गया लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि आजादी के इतने साल बाद भी महिला किसान महज मजदूर के घेरे में ही नजर आती है। राष्ट्रीय महिला किसान दिवस पर बात करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉक्टर सोनाली शर्मा बताती है कि "भारत की ग्रामीण महिलाओं को देश की असली वर्किंग वुमन कहा जाता है। आखिर इसमें सच्चाई भी है क्योंकि देश में एक ग्रामीण पुरूष वर्ष भर में 1800 घंटे खेती का काम करता है जबकि एक ग्रामीण महिला वर्ष में 3000 घंटे खेती का काम करती है इसके इतर भी उन्हें अन्य घरेलू काम करना पड़ते हैं। जहां भारत में लगभग 6 करोड़ से अधिक महिलाएं खेती का काम संभालती है। वहीं दुनियाभर में महिलाओं का कृषि कार्यो को करने में 50 प्रतिशत का योगदान रहता है। बावजूद उन्हें कभी खेती करने का श्रेय नहीं दिया जाता है और वे हमेशा हाशिए पर रही हैं। खेती का इतना काम करने के बाद भी उन्हें कभी किसान नहीं माना गया। " डॉक्टर शर्मा के मुताबिक ज्यादा मेहनत और उत्पादन करने के बावजूद कृषि लायक खेतों का मालिकाना हक पुरुषों के पास ही है। लैटिन अमेरिका में 80 फीसदी जमीन पर हक पुरुषों का है। एशियन देशों में तो स्थिति और खराब है। एशिया के देशों में जमीन पर महिलाओं का हक 10 प्रतिशत से भी कम है। इसके अलावा तकनीकी और नई शिक्षा के मामलों में भी महिलाओं को बराबर का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। महिला किसानों के हालातों को आज बेहद विकट बताते हुए डॉक्टर शर्मा बताती है कि जब महिलाएँ कृषि के क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं तो इस कार्य में उनकी निरंतरता को बनाए रखने के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य है उन्हें भूमि संपत्ति के अधिकारों को सौंपना। एक बार महिला किसानों को प्राथमिक अर्जक और भूमि परिसंपत्तियों के मालिकों के रूप में सूचीबद्ध कर दिया जाए तो उनके लिये बैंकों से ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा। साथ ही महिला किसान तकनीक और मशीनों का उपयोग करके फसल उगाने और गाँव के व्यापारियों या थोक बाजारों में उपज का निपटान करने का निर्णय ले सकेंगी। इस प्रकार वास्तविक और दृश्यमान किसानों के रूप में उनकी पहचान सुनिश्चित हो सकेगी।

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