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सिवाना की अरावली पर्वतमाला पहाड़ियों में लेंथोनोइट ग्रुप दुर्लभ धातु के अथाह भंडार।

सिवाना की अरावली पर्वतमाला पहाड़ियों में लेंथोनोइट ग्रुप दुर्लभ धातु के अथाह भंडार। बाड़मेर। दस साल पहले भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने सिवान...

सिवाना की अरावली पर्वतमाला पहाड़ियों में लेंथोनोइट ग्रुप दुर्लभ धातु के अथाह भंडार।


बाड़मेर। दस साल पहले भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने सिवाना क्षेत्र में स्थित अरावली पर्वतमालाओं की श्रृंखला में दुर्लभ खनिज के अथाह भंडार मिलने के संकेत मिले थे, इसके बाद टीम ने अलग-अलग जगहों पर सर्वे का कार्य शुरू किया, जहां पर विभिन्न प्रकार के खनिज मिलने के प्रमाण मिले हैं। सिवाना के समीप स्थित दंताला दरगाह की पहाड़ियों में हुए सर्वेक्षण में तांबा नुमा खनिज मिलने का प्रमाण मिला है, वहीं समीपवर्ती बुड़ीवाड़ा गांव में भी सर्वेक्षण किया, जहां पर भी धातु होने के प्रमाण मिले हैं।  

उल्लेखनीय है कि भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की टीम ने करीब दस साल पहले सिवाना क्षेत्र में रेअर अर्थ (दुर्लभ खनिज) का बड़ा खजाना होने के प्रमाण दिए थे।भारत का पहला टेरिस्टीअल (जमीन पर पाए जाने वाले खनिज) का बड़ा भंडार है। पूरे विश्व में इसका 97 प्रतिशत निर्यात चीन करता है। फिलहाल दंताला रमणिया व बुड़ीवाड़ा में धातु होने के प्रमाण मिले हैं।
इस क्षेत्र में करीब 15 से अधिक खनिज पदार्थ मिलने के प्रमाण मिले हैं। करंट साइंस में 2010 में छपे शोध-पत्र में राखी-फूलन क्षेत्र से कोवेसाइट एवं टिसोवाइट नामक खनिजों को एक्सआरडी एवं एनएमआर तकनीक से प्रमाणित किया। ये खनिज सीलिका की पालीमोर्फ, जो 2000 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर एवं दस जीपीए प्रेशर पर बनते हैं। साधारणत: यह खनिज ज्वालामुखी चट्टानों में नहीं पाए जाते, लेकिन 2005 में टीम का शोध-पत्र करंट साइंस में छपा। इसमें चुम्बकीय कांच के गोले की खोज की, जो उच्च तापक्रम पर बनते हैं।

इससे यह संकेत मिला कि पश्चिमी राजस्थान में कोई उच्च ताप-दाब की भू-वैज्ञानिक घटना घटी है। सिवाना रिंग का गोलाकार आकार उसकी भू-आकृति क्रिटिसियस काल (65 मिलियन वर्ष) की रेडियल डाइट्स मिलना यह संकेत देता है कि शायद 20 किलोमीटर त्रिज्या का उल्कापिण्ड यहां टकराया होगा। परिणामस्वरूप 200 किमी त्रिज्या की सिवाना संरचना बनी। इन्हीं डाइट्स में यह रेअर अर्थ खनिज मिलने की संभावना जताई गई। खुदाई में अमोनियम नाइट्रेट सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ मिलने के भी प्रमाण है, जिस पर पूरा सर्वे होने से पहले टीम के अधिकारी खुलकर इसके बारे में बताने से इंकार कर रहे हैं।

अथाह  संपदा पर हावी हो रहे हैं खनन माफिया
सिवाना की पहाड़ियों में बड़े स्तर पर अवैध खनन का कार्य चल रहा है। ऐसे में यहां मिले बिलियन डॉलर के रेअर अर्थ (दुर्लभ खनिज) पर खनन कर नुकसान पहुंचाने की आशंका है। इस इलाके में ग्रेनाइट की कई लोगों ने लीज ले रखी है लेकिन लीज के अतिरिक्त क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है। इसकी रोकथाम को लेकर कार्रवाई नगण्य होने से यह खनिज जालोर, बाड़मेर और अन्य क्षेत्रों में पहुंच रहा है।

सात गांवों में खनिज पदार्थ होने के प्रमाण
बाड़मेर में सिवाना क्षेत्र के कमठाई, दांता, राखी, देवड़ा, फूलन, दंताला, रमणिया, डंडाली में खनिज प्रदार्थ मिलने के प्रमाण मिले है। सिवाना के चारों तरफ एक गड्ढेनुमा रचना है, जिसमें ग्रेनाइट और रॉयलाइट व एल्केलाइन आग्नेय चट्टानें हैं। इसे सिवाना रिंग्स कॉम्पलैक्स और मालानी रॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। करीब 15 प्रकार के खनिज हैं, जो भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक लेंथोनोइट ग्रुप के हैं।

1993 में तीन इंजीनियरों ने शुरू किया था कार्य
वर्ष 1993 में परमाणु ऊर्जा विभाग क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर के तीन इंजीनियरों ने रमणिया में कैंप लगाकर रमणिया, कुंडल, महिलावास, मोकलसर, देवंदी सहित सिवाना क्षेत्र की पहाड़ियों में घूमकर करीब 6 माह तक यहां से पत्थरों के सैंपल लेकर जयपुर लेकर गए थे। इसके बाद निरंतर हर दो-तीन साल बाद इस क्षेत्र में सर्वे कार्य परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा जारी रहा तथा वर्ष 2013-14 से इस क्षेत्र में एक कंपनी द्वारा कार्य शुरू किया।

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