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समदड़ी पत्रकार संघ की आम बैठक आयोजित की गई।

समदड़ी पत्रकार संघ की आम बैठक आयोजित की गई। ग्रामीण पत्रकारों के भूखंड आवंटन सहित विभिन हितों को लेकर खास विषयों पर चर्चा की गई बाड़मेर/समदड़ी।...

समदड़ी पत्रकार संघ की आम बैठक आयोजित की गई।


ग्रामीण पत्रकारों के भूखंड आवंटन सहित विभिन हितों को लेकर खास विषयों पर चर्चा की गई
बाड़मेर/समदड़ी। पत्रकार संघ की बैठक अध्यक्ष सुनील दवे की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें सभी पत्रकारों ने मिलकर तहसील स्तर पर भूखंड आवंटन करवाने को लेकर चर्चा की वही अध्यक्ष सुनील दवे ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि जिस तरीके से कोरोना महामारी के चलते ग्रामीण क्षेत्र के समस्त पत्रकारों की आजीविका चलाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगने लगा है, क्योंकि बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों में कार्य करने वाले ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकार जिला और राज्य लेवल पर बैठने वाले पत्रकारों के अधीन होते कई वर्षों से आम गरीब व्यक्ति की आवाज बुलंद करने वाले पत्रकारों को आज भी पत्रकारों की श्रेणी का दर्जा नहीं मिल पाया है, वहीं किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ  नहीं मिल पा रहा है, यह विषय बहुत ही गंभीर है, इसको लेकर समस्त ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों को एकजुट होकर शासन एवं प्रशासन तक अपनी मांग को उठाते हुए पुरजोर से ज्ञापन के जरिए मांग रखनी चाहिए, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों को भी अपना हक मिल सके हालांकि  राज्य सरकार ने हाल ही में अधिस्वीकृत एवं गैर अधिस्वीकृत पत्रकारों को भी भूखंड आवंटन सहित विभिन्न प्रकार की योजनाओं से जोड़ने की बात की गई है, लेकिन अभी तक संस्थानों एवं जिला मुख्यालय पर बैठने वाले पत्रकारों ने किसी प्रकार की ना सूची तैयार की है, ना ही कभी इन मुद्दों पर कभी चर्चा हुई है, जिसके चलते आम ग्रामीण पत्रकार जो दिन-रात बगैर किसी स्वार्थ के जनहित के मुद्दों को उठाते हैं, उनको किसी भी प्रकार का कोई सरकारी या गैर सरकारी लाभ नहीं मिल पा रहा है, वही कोरोना महामारी के चलते निजी व्यवसाय भी पूरी तरह से ठप पड़ा है, जिसके चलते अब ग्रामीण क्षेत्र के छोटे-छोटे पत्रकारों के लिए सबसे बड़ा संकट आजीविका चलाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, वही संस्थाओं द्वारा विज्ञापन के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है, वह विचारणीय बिंदु है, जिस तरीके से जिला मुख्यालय या राज्य स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र में पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से कार्य कर रहे पत्रकारों की सूची नहीं होने के कारण दिन-ब-दिन यूट्यूब सहित अन्य सोशल साइट के जरिए जिनका पत्रकारिता से कोई सरोकार नहीं है, उनको भी प्रेस कार्ड पैसों के बल पर दिए गए हैं, जो अब बड़ी मुसीबत खड़ी कर रहे हैं, इससे स्थानीय प्रशासन भी परेशान है प्रत्येक 10 वाहन में से एक वाहन पर प्रेस लिखा हुआ नजर आता है, जिसके कारण प्रशासनिक अधिकारी भी पत्रकारों को पहचान नहीं पा रहे कौन सही वास्तविक पत्रकार है या फर्जी इसको लेकर भी जिला मुख्यालय से पुलिस अधीक्षक द्वारा पुलिस वेरिफिकेशन करवाते हुए जिला मुख्यालय से जितने भी ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रकारों की सूची तैयार की जाए और उन्हें जिला मुख्यालय के द्वारा स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों तक उस की प्रतिलिपि भेजी जाए, ताकि इन फर्जी पत्रकारों पर भी नकेल कसी जाए वहीं कई तरह के ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी पत्रकार आकर चौथ वसूली का भी कार्य कर रहे हैं, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र में वास्तविक पत्रकारिता करने वाले पत्रकार भी बदनाम हो रहे हैं, क्योंकि उन पर प्रभावी कार्यवाही नहीं होने के कारण दिन-ब-दिन हौसले बढ़ते जा रहे हैं, सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है, आने वाले समय में जो साख पत्रकार अपनी खो चुके हैं वह पुनः प्राप्त होगी वहीं ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों की शैक्षणिक योग्यता भी कम से कम 10 वीं पास होना अनिवार्य हो, क्योंकि यह अनिवार्यता नहीं होने के कारण शब्दों में अक्सर त्रुटियां देखी जाती है,अर्थ का अनर्थ होता जा रहा है।
इस दौरान बैठक में रामलाल चौधरी गौतम प्रजापत राजेश भाटी मदन राणा प्रेम सोनी मेंलाराम राठौड़ धन्नाराम राखी तहसील के समस्त पत्रकार मौजूद रहे।

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