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गांधी और कलाम के स्वप्न को साकार करने में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका: फड़ौदा

गांधी और कलाम के स्वप्न को साकार करने में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका:  फड़ौदा बाड़मेर/गिड़ा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और 21वीं सदी के स्...

गांधी और कलाम के स्वप्न को साकार करने में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका:  फड़ौदा


बाड़मेर/गिड़ा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और 21वीं सदी के स्वप्न कार भारत रत्न डॉ. अब्दुल कलाम के सपनों को साकार करने में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है विद्यालयों में तैयार हो रही नन्हें बालकों की नई पौध को मनचाहा आकार देकर भारत को विश्व शक्ति बनाया जा सकता है राष्ट्र निर्माण में इनका सबसे बड़ा योगदान है यह विचार इको क्लब राउमावि पूनियों का तला के तत्वावधान में आयोजित गांधी पखवाड़े के समापन और मिसाइल मैन, पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम की जयंती "विद्यार्थी दिवस" के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में पीईईओ महेंद्र सिंह फड़ौदा ने व्यक्त किए।
इको क्लब प्रभारी संतोष कुमार गोदारा ने बताया कि डॉ अब्दुल कलाम का राष्ट्र को अमूल्य योगदान है उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था। भारत के मिसाइल कार्यक्रम और पोखरण परमाणु परीक्षण -2 के जनक अब्दुल कलाम ही थे, विद्यार्थियों से कलाम साहब को विशेष स्नेह था, उन्होंने अपने जीवन की अंतिम श्वास विद्यार्थियों के बीच मार्गदर्शन करते वक्त ली थी, इसी तरह आजादी के बाद भारत का नवनिर्माण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों की बुनियाद पर हुआ था इसलिए इन दो महापुरुषों का भारत अविस्मरणीय अमूल्य योगदान रहेगा। इस अवसर पर कोविड-19 जन जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय में चल रहे निर्माण कार्यों के श्रमिकों को मास्क वितरित किए गए और गांव में राशन वितरण के लिए उपस्थित ग्रामवासियों को कोरोना गाइडलाइन से अवगत करवाया गया।
इस अवसर पर विद्यालय स्टाफ साथियों ने श्रमदान करते हुए पौधों में निराई गुड़ाई करके पौधों को पानी पिलाया। विद्यालय की वाटिका के पौधों की कटाई करके खाद पानी दिया। गांधी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। गांधी पखवाड़े के अंतर्गत किए गए श्रमदान कार्यों में इको क्लब प्रभारी संतोष कुमार, युवा शिक्षक अनूप कुमार, राजेंद्र मुंडेल, जगजीवन राम के द्वारा किए गए योगदान की विशेष सराहना की गई। इस अवसर पर महेंद्र सिंह फड़ौदा, व्याख्याता संतोष कुमार, माधुसिंह, इंदा राम, पूनम कुमारी, रामस्वरूप, अनूप कुमार, राजेंद्र मुंडेल, अशोक कुमार, खरताराम, बालू सिंह, पूनमाराम, जगजीवन राम, हंसराज, और स्काउट उपस्थित रहे।

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