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सृष्टि पालन और संहार करने वाली त्रिगुणात्मक शक्तियों की उपासना के लिए महानवरात्रि का पर्व आज से शुरू।

सृष्टि पालन और संहार करने वाली त्रिगुणात्मक शक्तियों की उपासना के लिए महानवरात्रि का पर्व आज से शुरू। सिरोही/पिंडवाड़ा। (मुकेश पाल सिंह) सभी...

सृष्टि पालन और संहार करने वाली त्रिगुणात्मक शक्तियों की उपासना के लिए महानवरात्रि का पर्व आज से शुरू।


सिरोही/पिंडवाड़ा। (मुकेश पाल सिंह) सभी नवरात्रि में शारदीय नवरात्रि का एक अलग ही महत्त्व है, दुर्गा सप्तशती के 12वें अध्याय में लिखा है कि शरद काल में जो मां शक्ति की पूजा आराधना करते हैं उसे मां शक्ति स्वयं सभी बाधाओं से मुक्त कर धन-धान्य और पुत्र से संपन्न कर देती हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ शनिवार को होने से मां शक्ति का वाहन अश्व होगा। अश्व वाहन होने से छत्र भंग, पड़ोसी देशों से युद्ध तथा आंधी तूफान होने का फल शास्त्रों में दर्शाया गया है।

शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ अवसर पर घट स्थापना के लिए चित्रा नक्षत्र पर्यंत सर्वार्थ सिद्धि योग तथा अभिजीत मुहूर्त के संधिकाल में दोपहर 12:01 से लेकर 12:45 तक करना श्रेष्ठ होगा। वहीं शनिवार से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि शक्ति उपवास को के लिए खास है।

त्रिगुणात्मक शक्ति की उपासना:-
वृहद प्रमाणों से सिद्ध हो चुका है कि परमात्मा एक ही है जो निर्गुण, निराकार और निरंजन है। यही अपनी त्रिगुणात्मक, त्रिशक्त्यात्मक माया शक्ति से शबलित होकर जगत की सृष्टि, पालन और संहार तीन प्रकार के कार्य के भेद से ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र इन तीनों नामों को धारण करते हैं, और जिन तीन प्रकार की शक्तियों से शबलित होकर त्रिमूर्ति स्वरूप में आते हैं उन्हीं के नाम महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली है। ब्रह्मा की शक्ति जिससे सृष्टि होती है वह महासरस्वती, विष्णु की शक्ति जो पालन करती और कराती है वह महालक्ष्मी और रुद्र की शक्ति जिससे संहार होता है उसका नाम महाकाली है। भगवान शंकराचार्य ने भी कहा है कि भगवान अपनी शक्ति से शबलित होकर ही अपना काम करने में समर्थ है नहीं तो नहीं। 

संपूर्ण सृष्टि एवं जगत का प्रवर्तित चक्र इन तीन शक्तियों पर ही आधारित है।

त्रिगुणात्मक शक्ति:-
परमात्मा जगदीश्वर सृष्टि, पालन और संहार इन तीनों कामों के चक्रों को लगातार चलाते हुए ब्रह्मा विष्णु और रूद्र इन तीन नामों से दुनिया में प्रसिद्ध है और उनके तीन कामों को कराने वाली जगन्माता म भगवती महामाया के अंतर्गत जो सृष्टिशक्ति, पालनशक्ति और संहार शक्ति है उन्हीं के नाम महाकाली, महालक्ष्मी औऱ महासरस्वती है।

महाकाली और रुद्र:-
रुद्र को जो संहार रूपी काम करना है उसे कराने वाली महाकाली रूपी रुद्रशक्ति  अपने भयंकर कार्य के अनुरूप और योग्य काले रंग की होती है परंतु वह संहार का काम संहार के लिए नहीं, बल्कि सारे संसार के लक्षण और कल्याण के लिए होता है। संहार का काम करने के बाद महाकाली उस काम को भगवान विष्णु के हाथों में देकर पालन करने का कहती है।

महालक्ष्मी और विष्णु:-
विष्णु को जो पालन रूपी काम करना है उसे कराने वाली महालक्ष्मी रूपी विष्णु शक्ति अपने पालनात्मक कार्य के अनुरूप और योग्य स्वर्ण वर्ण की होती है। परंतु वह पालन का काम सिर्फ पालन करके छोड़ देने के लिए नहीं बल्कि पोषण और वर्धन करने के उद्देश्य से किया जाता है। इसलिए पालन का काम करके पाली हुई चीजों को ब्रह्मा के हाथों में सौप कर सृष्टि करने का कहती है।

महासरस्वती और ब्रह्मा:- 
ब्रह्मा को जो नई चीजों का आविष्कार या सृष्टि रूपी काम करना है उसे कराने वाली महासरस्वती रूपी ब्रह्मशक्ति अपने रचनात्मक कार्य के अनुरूप और योग्य सफेद रंग की होती है परंतु वह पोषण एवं वर्धन का काम आगे आगे बढ़ाते जाने के ही मतलब से नहीं बल्कि पोषण और वर्धन करने के समय जो बुरे या अनिष्ट पदार्थ भी उसके साथ सम्मिलित हो जाया करते हैं उनको दूर हटा कर ठीक कर लेने  के उद्देश्य से ही होता है। इसलिए वह वर्धन के काम के हो जाने के बाद अपनी बड़ाई हुई चीजों को रूद्र के हाथों में देकर पोषण और वर्धन के समय जो खराब है और त्रुटियां आ गई हो उसका संहार करने का कहती है।

इसी प्रकार त्रिमूर्ति और त्रिशक्ति के द्वारा सृष्टि, पालन और संहार का प्रवर्तित चक्र चलता रहता है। त्रिमूर्ति त्रिशक्ति से बिना शबलित होकर कुछ भी नहीं कर सकते है, तो मानव जीवन के लिए भी शक्ति उपासना की विशेष प्रधानता है। और शक्ति उपासना के लिए शारदीय नवरात्रि सर्वोत्तम है। इसलिए शनिवार से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्र के 9 दिनों में मां शक्ति की घटस्थापना कर विशेष पूजा, अर्चना कर वर्तमान परिदृश्य में व्याप्त प्रत्येक महासंकट से मुक्त होने का एक मात्र उपाय मां शक्ति की आराधना ही है।
- ज्योतिषी-हर्षवर्द्धन व्यास, पिण्डवाड़ा

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