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राजस्थान सरकार के संपर्क पोर्टल के परिवाद को तहसीलदार व विकास अधिकारी ने बनाया मजाक।

राजस्थान सरकार के संपर्क पोर्टल के परिवाद को तहसीलदार व विकास अधिकारी ने बनाया मजाक। बाड़मेर/गिड़ा। परिवादी थानराज करेला ने गिडा तहसील के ग्रा...

राजस्थान सरकार के संपर्क पोर्टल के परिवाद को तहसीलदार व विकास अधिकारी ने बनाया मजाक।


बाड़मेर/गिड़ा। परिवादी थानराज करेला ने गिडा तहसील के ग्राम पंचायत खोखसर में चारागाह भूमि के अतिक्रमण से सम्बन्धित फ़रवरी माह में तहसीलदार गिड़ा को परिवाद दिया था। ग्राम पंचायत द्वारा अतिक्रमण करने पर सरकार के तय नियमो के अनुसार तहसीलदार को कार्यवाही करनी होती है जबकि तहसीलदार गिड़ा ने इस परिवाद में अपनी जवाबदेही नहीं मानकर अपने विभाग से सम्बन्धित निस्तारण नही होना बताकर परिवाद को गैर जिम्मेदाराना विभाग पंचायतीराज के विकास अधिकारी को भेज दिया तब से विकास अधिकारी व जिला परिषद के अधिकारी परिवाद को एक दुसरे को स्थानान्तरण करने का खेल खेल रहे है। पिछले आठ महीने में परिवाद का निस्तारण करने के बजाय इन अधिकारियों द्वारा कई बार एक विभाग से दुसरे विभाग में स्थानान्तरण करने का कार्य किया जा रहा है, इनके द्वारा परिवाद के निस्तारण को लेकर पिछले आठ महीने में कोई टिप्पणी तक नहीं की गई है। बार बार परिवाद के विषय व विभाग को परिवर्तन कर केवल मात्र खानापूर्ति कर रहे है।

परिवादी ने जिम्मेदार कार्मिको के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने के लिए लिखा उच्चाधिकारियों को पत्र:
परिवादी थानराज करेला ने परिवाद का सही से निस्तारण नही करने के लिए जिम्मेदार कार्मिको के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु राजस्व विभाग व संभागीय आयुक्त को पत्र लिखकर मांग की है, परिवादी का आरोप है की ग्राम पंचायत खोखसर में फर्जी जाली दस्तावेजो के आधार पर चारागाह भूमि में कार्य सेक्शन कर करोड़ों रूपये उठाये गए है इसमें ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के कई अधिकारी शामिल है, कानूनी कार्यवाही के लिए परिवादी ने सूचना के अधिकार के तहत ग्राम पंचायत खोखसर से सूचनाये मांगी जिसमे परिवादी को सूचना के नाम पर जाली कूटरचित सूचना तैयार करके दी है।

चारागाह भूमि में नियम विरुद्ध कार्य दर्शाकर सरकारी धनराशि के करोड़ो के गबन में कई अधिकारी लिप्त:
परिवादी थानराज करेला का कहना है कि ग्राम पंचायत खोखसर में चारागाह भूमि चारागाह भूमि में नियम विरुद्ध कार्य दर्शाकर करोड़ों की सरकारी धनराशि के गबन में कई अधिकारी लिप्त है इसलिए मिलीभगत होने के कारण कानूनी कार्यवाही से बचने के इरादे से परिवादी द्वारा दिए परिवाद का आठ महीने से निस्तारण नहीं किया गया है। जबकि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दिए परिवादों के निस्तारण के लिए तय समयसीमा एक महीने की होती है।

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