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शिक्षा की राह में मौत का मंजर, भयंकर हादसे न्यौता दे रहा टांका।

शिक्षा की राह में मौत का मंजर, भयंकर हादसे न्यौता दे रहा टांका। बाड़मेर/धोरीमन्ना। उपखंड में नई ग्राम पंचायत लोलो की बेरी ग्राम पंचायत में कई...

शिक्षा की राह में मौत का मंजर, भयंकर हादसे न्यौता दे रहा टांका।


बाड़मेर/धोरीमन्ना। उपखंड में नई ग्राम पंचायत लोलो की बेरी ग्राम पंचायत में कई सड़क मार्गो के समीप क्षतिग्रस्त टांके, जर्जरहाल में बड़े हादसे का न्यौता दे रहे हैं लोलो की बेरी से बुल ग्रेवल सड़क पर पटरी के किनारे आबादी क्षेत्र में बना टांका जर्जर होकर लोहे के गट्टर सहित मलबा टूटकर गिर चुका है। हादसे की आंशका के चलते विद्यालय आने, पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हर समय सावधानी बरतनी पड़ती है। मौत के इस कुएं के पास से निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से खचाखच भरी बसें तेज़ गति चलतीं है जिससे हमेशा बड़े हादसे की आंशका बनी रहती है। 


उल्लेखनीय है कि बिलकुल सड़क के किनारे काफ़ी सालों पहले पेयजल समस्या को लेकर इस सार्वजनिक टांके का निर्माण हुआ था। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि टांके निर्माण में घटिया सामग्री लगाने से एक बार भी काम नहीं आया ओर धीरे धीरे-धीरे पत्थर की पट्टिया टूटकर लोहे के गट्टर सहित अंदर गिर गई। यह टांका 20 फीट गहरा है ग्रामीणों ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत को टांके की मरम्मत या मिट्टी डालकर पूर्ण रूप से भरने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्राम पंचायत मीठड़ा खुर्द व लोलो की बेरी में बने दर्जनों टांके जजर्रहाल में है इनका निर्माण महज़ दिखावे ओर हादसों को न्योता दे रहे हैं। एक ओर सरकार जहां जल संरक्षित करने के लिए लाखों रुपए जल स्वावलम्बन कार्य कर पानी को सहजने में बहा रही है, वहीं इन गांवों में बने टांकों में जल संरक्षित तों दूर इनके इन हालात में देखकर भयानक हादसे को न्योता दे रहे हैं। ऐसे में शिक्षा की राह में मौत के कुओं को लेकर प्रशासन मुक दर्शक बना हुआ हैं।

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