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कभी काले पानी की सजा के नाम से मशहूर रहा रेगिस्तान अब नखलिस्तान बनकर उभरा हैं।

कभी काले पानी की सजा के नाम से मशहूर रहा रेगिस्तान अब नखलिस्तान बनकर उभरा हैं। @ कैलाश गोस्वामी बाड़मेर। शरहदी जिले को कभी काले पानी के नाम स...

कभी काले पानी की सजा के नाम से मशहूर रहा रेगिस्तान अब नखलिस्तान बनकर उभरा हैं।


@ कैलाश गोस्वामी
बाड़मेर। शरहदी जिले को कभी काले पानी के नाम से पुकारा जाता था लेकिन अब यह तस्वीर बदल गई हैं। कभी बंजर भूमि सूनापन दिलाती थी लेकिन अब किसानों की मेहनत से सोना उगल रही है। थार के मरुस्थल में अब व्यावसायिक कृषि होने लगी है, बाड़मेर में किसान अनार, अरंडी, अन्जीर के साथ खजुर की खेती कर रहे है। किसानों के नवाचार से जहां पहले सिर्फ खरीफ की फसल होती थी वे खेत अब किसानों को लाखों रुपयों की पैदावार ले रहे है।
सिणधरी क्षेत्र के भाटा, धूड़िया मोतीसिंह क्षेत्र में 50 से अधिक कृषि कुओं पर अनार की बम्फर पैदावार हो रही है। प्रत्येक कुए पर 1500 से 2 हजार तक अनार के पौधे लगे हुए है। क्षेत्र के एक किसान ने बताया कि तीन साल की मेहनत के बाद पौधें पनपे है और 3 से 4 हजार की पैदावार हो जाती है लेकिन भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत निकलने वाले हाइवे के कारण मेरे पंद्रह सौ पौधे नष्ट हो जाएंगे।

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