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हरियाणा के 54वें स्थापना दिवस पर ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।

हरियाणा के 54वें स्थापना दिवस पर ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन। @ इंद्रजीत शर्मा महेंद्रगढ़। हरियाणा भूमि वैदिक काल से आर्यों की भू...

हरियाणा के 54वें स्थापना दिवस पर ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।

@ इंद्रजीत शर्मा
महेंद्रगढ़। हरियाणा भूमि वैदिक काल से आर्यों की भूमि रही है और यह क्षेत्र हड़प्पा सभ्यता का भी केंद्र रहा है। यह भूमि ऐतिहासिक व सांस्कृतिक रूप से आरंभ से ही मजबूत रही है। पंजाब से जब अलग हुए तो रेतीला और जंगली हिस्सा मिला लेकिन हमने अपनी मेहनत के बल पर इसे हरित प्रदेश के रूप में विकसित किया और आज हरियाणा राज्य अपनी ही नहीं बल्कि भारत के अन्य क्षेत्रों की खाधान्न की आवश्यकता को पूरा कर रहा है। यह हरियाणावासियों की मेहनत का ही परिणाम है कि इसे देश के विकास का इंजन कहा जाता है। यह विचार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि), महेंद्रगढ़ के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने हरियाणा राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर व्यक्त किए।
कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने हरियाणा दिवस के मौके पर दीनबंधु छोटू राम मेमोरियल एजुकेशन सोसाइटी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी ‘चौपाल‘ को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा राज्य आज अपनी स्थापना के 54 साल पूर्ण कर चुका है और इस प्रदेश की मिट्टी में कुछ अलग ही बात है कि विभिन्न कठिनाईयों के बाद भी यह प्रदेश देश को नई दिशा दिखाने वालों की जन्मभूमि, कर्मभूमि रहा है। प्रो. कुहाड़ ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में लाला लाजपत राय, चौधरी छोटू राम, राव तुलाराम और सेठ छाजू राम जैसे असंख्य वीरों ने योगदान दिया। आजाद भारत के बाद अस्तित्व में आये इस राज्य ने जमीन से आसमान तक कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं छोड़ा है जहां हरियाणावासियों की छाप न हो। कल्पना चावला से लेकर जूही चावला, रणदीप हुड्डा, सोनू निगम और सुनील दत्त जैसे अनेक ऐसे इस धरती से जुड़े होनहार हरियाणा की ही मिट्टी से जुड़े थे। लोक संस्कृति की बात करें तो पंडित लख्मीचंद, पंडित मांगेराम, बाजे भगत व मास्टर सतबीर हरियाणा की शान का प्रतीक है। योग गुरु बाबा रामदेव भी इसी धरती के लाल है इसी तरह सेना के जनरल वी के सिंह, जनरल दलबीर सुहाग भी हरियाणा से ही जुड़े है। कुलपति बोले खेलों में तो हरियाणा का नाम देश में टॉप पर आता है फिर बात चाहे वीरेंद्र सहवाग की हो, गीता, बबिता फोगाट, साक्षी या फिर सायना नेहवाल की। हरियाणा ने हर मोर्चे पर सफलता का परचम लहराया है। प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने इस मौके पर हमारी बेटियां भी इस प्रदेश की ख्याति बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दे रही है यह साबित कर रही है कि वो किसी से कम नहीं है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में पानीपत की धरती से बेटी बचाओ, बेटी पढाओं का आह्वान किया था जिसका परिणाम है कि वर्ष 2019 में हरियाणा प्रदेश में लिंगानुपात 923 तक पहुंच गया है। हरियाणा राज्य ने प्रधानमंत्री के संकल्प को पूर्ण करने की जो इच्छा शक्ति दिखाई है वो यकीनन उल्लेखनीय है और हम इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रखेंगे। राज्य में छात्राओं को शिक्षा प्रदान करने हेतु सरकार के माध्यम से विभिन्न हितकारी योजनाएं भी चलाई जा रही है। जिससे लड़कियों की साक्षरता दर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
कुलपति ने कहा कि हमें गर्व है कि हम इस पावन भूमि से जुड़े है और इसकी सेवा का अवसर हमें प्राप्त हुआ। प्रो. कुहाड़ ने इस अवसर पर आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेरे लिए और हम सभी के लिए जरुरी की न सिर्फ हम अपने प्रदेश की विरासत, संस्कृति से अवगत हो बल्कि इसके प्रचार-प्रसार में भी योगदान दे। प्रो. कुहाड़ ने हरियाणा दिवस की सभी को हरियाणा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आसमान की बुलंदियों को हासिल करने की सीख दी।
प्रो. कुहाड़ ने कहा कि भारत की आजादी और आजाद भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाले सरदार पटेल को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लौह पुरूष के नाम से भी जाना जाता है। विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय व राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल शिक्षक, कर्मचारियों व अधिकारियों को प्रॉक्टर प्रो. राजेश मलिक ने देश की एकता व अखंडता की शपथ दिलाई और इस मौके पर विश्वविद्यालय परिसर में एकता दौड़ के माध्यम से सरदार पटेल के योगदान को याद किया गया। डीन छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. दिनेश कुमार गुप्ता व विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. राजेश मलिक ने बताया कि इस आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी व उनके परिवार के सदस्य बड़े ही उत्साह के साथ शामिल हुए। इनमें विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. राजेश कुमार मलिक, उप छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. मोनिका, डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. बिजेंद्र, डॉ. पवन कुमार मौर्या व डॉ. दिनेश चहल आदि के नाम प्रमुख रहे।

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