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लूणी नदी में काबिज अतिक्रमण को प्रशासन ने जाब्ते के साथ हटाया।

लूणी नदी में काबिज अतिक्रमण को प्रशासन ने जाब्ते के साथ हटाया। @ भगाराम पंवार बाड़मेर/बालोतरा। लूणी नदी में अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट के आदे...

लूणी नदी में काबिज अतिक्रमण को प्रशासन ने जाब्ते के साथ हटाया।


@ भगाराम पंवार
बाड़मेर/बालोतरा। लूणी नदी में अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में मंगलवार से प्रथम चरण में अतिक्रमण हटाने के अभियान की शुरूआत की गई। प्रथम चरण में लूणी नदी में चिन्हित चारदीवारी, बाउंड्री वॉल, शमशान घाट आदि को हटाया गया। मंगलवार सुबह नगर परिषद के कार्मिक, अतिरिक्त पुलिस जाब्ता, पटवारी के साथ प्रशासनिक अमले ने मेघा हाईवे ओवरब्रिज के समीप से अतिक्रमण हटाना शुरू किया। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार 19 नवंबर तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने एवं सुनवाई के दौरान अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। अतिक्रमण हटाने के दौरान जेसीबी मशीनों से लूणी नदी के बहाव क्षेत्र में काबिज अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान कुछ लोग अपने कागजात भी लेकर आए और एसडीएम व पटवारी से नोक झोंक भी करते दिखें परंतु प्रशासन ने सख्ती से नदी में किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की। अतिक्रमण हटानें की सूचना मिलने पर अतिक्रमियों में हडक़ंप मचा नजर आया। शहर में दिनभर प्रशासन की कार्रवाई की चर्चा जोरों पर रहीं।


गौरतलब है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अलग-अलग चरण में की जाएगी। लूणी नदी में अब तक 99 अतिक्रमण चिन्हित किए जा चुके है। इस मौके पर उपखंड अधिकारी रोहित कुमार, नगर परिषद आयुक्त शिवपालसिंह राजपुरोहित, डीएसपी सुभाष खोजा, थानाधिकारी निरजंन प्रतापसिंह, पटवारी बैसराराम प्रजापत सहित प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।

इधर हाईकोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार:
जनहित याचिकाकर्ता सुमेरलाल शर्मा की याचिका पर अतिक्रमण हटाने के आदेशों के बाद से हीं लूणी नदी में काबिज अतिक्रमियों में हडक़ंप मचा हुआ है। अतिक्रमियों ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर स्टे देने की मांग की थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने अतिक्रमियों को राहत देने से इनकार कर दिया। स्टे नहीं मिलने से अतिक्रमियों में निराशा छा गई।

प्रथम चरण में 20 अतिक्रमण हटाए जाएंगे:
लूणी नदी में अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रथम चरण में 10 नवंबर से 12 नवंबर तक चयनित 20 अतिक्रमण हटाएं जाएंगे। यह वह अतिक्रमण है जिनको अदालत से बेदखली के आदेश जारी कर दिए गए है। माननीय हाईकोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित की जाएगी, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
- शिवपालसिंह राजपुरोहित, आयुक्त नगर परिषद, बालोतरा।

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