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पहली बार सरकार के खिलाफ गांवों की सरकार, 21 जनवरी से ग्राम पंचायतों की तालेबंदी।

पहली बार सरकार के खिलाफ गांवों की सरकार, 21 जनवरी से ग्राम पंचायतों की तालेबंदी। बाड़मेर। ग्राम पंचायतों के ब्याज रहित पीडी खाते खोलकर संवैधा...

पहली बार सरकार के खिलाफ गांवों की सरकार, 21 जनवरी से ग्राम पंचायतों की तालेबंदी।



बाड़मेर। ग्राम पंचायतों के ब्याज रहित पीडी खाते खोलकर संवैधानिक वित्तीय अधिकारों में की जा रही कटौती को रोकने के लिए बाड़मेर सरपंच संघ अध्यक्ष हिन्दू सिंह तामलोर के नेतृत्व में सरपंचो ने बाड़मेर जिला कलक्टर विश्राम मीणा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायतों के वित्तीय स्वायत्तता एवं संवैधानिक वित्तीय अधिकारों पर कुठाराघात करते हुए ग्राम पंचायतों के ब्याज रहित पीडी खाता खोल दिए गए हैं। पीडी खाते के कस्टोडियन सीधे राज्य सरकार होती है। ऐसे में ग्राम पंचायतों को संवैधानिक रूप से मिल रही वित्तीय स्वतंत्रता समाप्त की जा रही है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों द्वारा सरपंच गणों को पीडी खाते के कोड जनरेट करने एवं लॉगिन आईडी बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वित्त विभाग एवं ग्रामीण विकास के अधिकारियों का यह निर्देश पंचायती राज संस्थाओं को सीधे राशि हस्तांतरित करने के संवैधानिक अधिकारों के पूर्णतया विपरीत
देवाराम कूडला ब्लॉक अध्यक्ष बाड़मेर ने बताया कि पिछले 2 वर्षों से कुछ प्रशासनिक अधिकारियों व कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा ग्राम पंचायतों को प्रशासनिक व वित्तीय रूप से पंगु बनाने के प्रयासों से आहत प्रदेश के सरपंच एक बार पुनः आन्दोलन की राह पर चलने को मजबूर हुए है।
रमेश कुमार  मेघवाल उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से प्रदेश में पंचायतों की मजबूती के स्थान पर ग्राम पंचायतों के अधिकारों में कटौती ही हुई है कभी महानरेगा योजना में सामग्री क्रय के नियमों के नाम पर, कभी विभिन्न प्रकार की ऑडीटो के नाम पर सरपंचों व पंचायतीराज पर दबाव बनाया जाता रहा है।
ऐडवोकेट अलसाराम कुमावत उन्होंने बताया कि मूल रूप से स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं तथा समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर स्थानीय संसाधनों से करने, बिना लाभ हानि के सिद्धांत पर कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों के साथ विभिन्न नये नये नियम बनाकर व्यावसायिक कम्पनी की तरह व्यवहार करने की प्रवृति पिछले कई वर्षों से लगातार बढती जा रही है वहीँ दूसरी और आम लोगों की ग्राम पंचायतों से अपेक्षाएं भी लगातार बढती जा रही है जिसके चलते सरपंच अत्यधिक दबाव में है।
रोशन खान ख़लीफ़े की बावड़ी  ने बताया कि सरकार के समस्त अन्य विभागों के विपरीत गाँव के अंतिम व्यक्ति से सीधा जुडाव मात्र स्थानीय पंच/सरपंच/ग्राम पंचायत का है, राज्य हो या केंद्र सरकार , इनके समस्त ग्रामीण विकास के कार्यक्रम व सेकड़ों योजनाओं का सञ्चालन ग्राम पंचायतों द्वारा लोक हित में किया जा रहा है जिसके लिये सरकार की आम जन में वाह-वाही होती है ,लेकिन प्रत्यक्ष निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के बावजूद सरपंचों की संविधान प्रदत्त शक्तियां धीरे धीरे कम की जा रही है इसको लेकर अब नव निर्वाचित सरपंचों में भारी आक्रोश है।
   
 खेत सिंह कोटड़ी ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में दूसरी बार सरकार के स्तर से जिला परिषद् के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को समस्त ग्राम पंचायतों के कोषालयों में निजी निक्षेप खाते खुलवाने हेतु निर्देश जारी हुए है जिनको लेकर सम्पूर्ण प्रदेश के सरपंच आक्रोशित है, पूर्व में फरवरी 2020 में भी कुछ अधिकारियों द्वारा इसके लिये प्रयास किया गया था लेकिन तब माननीय मंत्री महोदय ने सरपंच संघ के ज्ञापन के बाद उस पर विराम लगा दिया था लेकिन अब फिर से उसी कार्य को अंजाम दिया जा रहा है जोकि पंचायतीराज की मूल भावना के साथ सीधा खिलवाड़ है।
गिरीश जी खत्री रामसर पिछले लगभग 2 वर्ष से महानरेगा के कार्यों की सामग्री मद की राशि अभी तक जारी नहीं हुई है , राज्य सरकार द्वारा राज्य वित्त आयोग की राशि जारी नहीं की जा रही है जिसके चलते गाँवों में विकास पहले से ही ठप्प पड़ा है उपर से ग्राम पंचायतों के बैंक खातों की जगह निजी निक्षेप खातों के निर्देश सरपंच कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
जिला उपाध्यक्ष तेजदान साता ने बताया राजस्थान सरपंच संघ द्वारा इस समस्या पर गहनता से चर्चा के बाद सरकार को ज्ञापन देकर इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने का अनुरोध किया गया है साथ ही आगामी रणनीति भी घोषित की जा चुकी है। सरकार अपना निर्णय नहीं बदलेगी तो संघ द्वारा 21 जनवरी से जिलेभर के सभी पंचायतों की तालेबंदी के साथ साथ सरकारी योजनाओं का बहिष्कार किया जायेगा जिसके कारण होने वाली किसी प्रकार की असुविधा के लिये राज्य सरकार जिम्मेदार रहेगी।
     
सरपंचों ने ज्ञापन में राजस्थान सरकार से अनुरोध किया है कि जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाये ताकि गाँवों का विकास हो सके तथा कुछ अधिकारियों की कुचेष्टा पर तुरंत रोक लगाते हुए निजी निक्षेप खाते खुलवाने के आदेश निरस्त कर, ग्राम पंचायतों की लम्बे समय से लंबित मांगों का समाधान कर, गाँव व् गरीब के विकास का मार्ग प्रशस्त करावें ताकि चुनाव आचार संहिता व् अव्यवस्थित चुनाव कार्यक्रम के कारण पहले से ही ख़राब हो चुके समय में से शेष बचे समय का सदुपयोग हो सके।

इस दौरान उगम सिंह रानीगाँव, देवाराम कुड़ला, करीम खान, खेत सिंह कोटड़ी, गिरीश खत्री, जीत परमार, जितेन्द्र सिंह मूँगड़ा, रामसीन दान बिजासर, महेन्द्रपाल सियोल, नींब सिंह उंडखा, गोपाराम पटेल, विक्रम सिंह बावड़ी, अलसाराम कुमावत, सुनीता मूँढ, मिठन शाह, इशाक खान, हनीफ खान, प्रताप राम भील, नगराज गोदारा, जसराज धतरवाल, तनेराव सिंह भियाँड़, शैतानदान गुमाने का तला, हमीर सिंह केलनोर, नेनु राम बेनिवाल, जेता राम जानी, प्रवीण चौधरी, स्वरूपा राम, वालम सिंह आगोर, ईश्वर सिंह जसोल, कल्याणपुर पंचायत समिति से सरपंच संघ के उपाध्यक्ष सरपंच प्रतिनिधि भाई बगड़ु बिश्नोई, गंगावास सरपंच महेन्द्र सिंह राजपुरोहित, माणक राम चौधरी, फिरोज भाई, ओम चौधरी गंगावास, अजयपाल सिंह पायला, मुजीब खान, बाँकाराम चौधरी, धर्मेन्द्र कागा, रमेश मेघवाल, मखना राम, देवाराम सांजटा, अचला राम सियाग, जुगता राम भादु नोख, पाँचाराम मालपुरा, खेराजराम प्रजापत, जसवंत सिंह गोहड का तला, हबीब खान कंटल का पार, मनोहर विशनोई, गोरधन सिंह खबड़ाला, जुगता राम भादु, श्याम सिंह बँधड़ा, कादर खान ईंटादिया, सच्चु खान, शैयद मिठन शाह, वैन सिंह मारूड़ी, आदि सरपंचगण मौजूद रहे।

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