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पिण्डवाड़ा आदर्श विद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई।

पिण्डवाड़ा आदर्श विद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई। सिरोही/पिंडवाड़ा। वनांचल शिक्षा समिति द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक पि...

पिण्डवाड़ा आदर्श विद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई।



सिरोही/पिंडवाड़ा। वनांचल शिक्षा समिति द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक पिंडवाड़ा में स्वामी विवेकानंद जयंती अतिथियों द्वारा द्वीप प्रवज्जलन कर मनाई गई। विद्या मंदिर की बालिका दीपांशा कंवर ने "जिनके ओजस्वी वचनों से गूंज उठा था विश्व गगन वही प्रेरणा पुंज हमारे स्वामी पूज्य विवेकानंद" गीत  के पश्चात कार्यक्रम में मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण परिषद के प्रदेश सह संगठन मंत्री जगदीश कुलमी ने अपने उदबोद्धन मे बताया कि तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो, अमेरिका के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलवायी। 
वे केवल सन्त ही नहीं, एक महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे। वे भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के भी एक प्रमुख प्रेरणा के स्रोत बने। उनका विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहीं बड़े-बड़े महात्माओं व ऋषियों का जन्म हुआ, यही संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं-केवल यहीं-आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिये जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है। उनके कथन-"‘उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ। अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये। प्रधानाचार्य अशोक कुमार सेन ने बताया कि शिक्षा ऐसी हो जिससे बालक का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास हो सके। साथ ही
 बालक के चरित्र का निर्माण हो, मन का विकास हो, बुद्धि विकसित हो तथा बालक आत्मनिर्भर बने। विद्या मंदिर के प्रवीण सिंह ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी के बारे में जानकारी कराई। इस कार्यक्रम में सुरेंद्र सिंह, दुर्गेश व्यास, हरिओम दत्त, किशोर रावल, परबत सिंह, श्याम सिंह, जसवंत सिंह, सुरेश कुमार, गंगा कुंवर एवं विद्या मंदिर के आचार्य  एंव आचार्या एवं भैया एंव बहिन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कुसुम गुर्जर ने किया।

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