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किसानों के काम की ख़बर: किसानों को चना की फसल में फली छेदक कीटनाशक नियंत्रण जानकारी। पढ़ें पूरी ख़बर..!

किसानों के काम की ख़बर: किसानों को चना की फसल में फली छेदक कीटनाशक नियंत्रण जानकारी। पढ़ें पूरी ख़बर..! @ पप्पुराम प्रजापति आहोर  जालौर। जिले क...

किसानों के काम की ख़बर: किसानों को चना की फसल में फली छेदक कीटनाशक नियंत्रण जानकारी। पढ़ें पूरी ख़बर..!



@ पप्पुराम प्रजापति आहोर 
जालौर। जिले की आहोर तहसील में बुवाई की गई चना फसल में इन दिनों फली छेदक कीट की लट का प्रकोप संभावित है। इस कीट की लट के प्रयोग से फसल बचाव हेतु कृषि विभाग जालौर द्वारा किसानों को उचित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। जालौर कृषि अधिकारी फुलाराम मेघवाल ने बताया की फली छेदक कीट की लट हरे रंग की होती है जो बाद में भूरे रंग की हो जाती है यह आरंभ में चने की पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है। तथा फली लगने पर उन्हमें छेद कर के अंदर का दाना खाकर खोखला कर देती है। इस किट की मादा पतंगा पौधे के नाजुक हिस्सों पत्तियों और फुल पर बगकीले 700 से 1000 तक अंडे देती है। यह अंडे 4 से 5 दिन में फुटते हैं जिससे लटें (सुण्डिया) निकलती हैं। यह लटे लगभग 20 दिनों में पूर्णतः विकसित होती है, उसके बाद लगभग 10 से 12 दिन तक प्यूपा के रूप में जमीन के नीचे पड़ी रहती हैं। इस कीट की अवस्था में फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं। फसल में होने वाले नुकसान के बचाव के लिए किसानों को सलाह दी जाती हैं, किट आर्थिक हानि स्तर तक न पहुंचे, इसके लिए आवश्यक है फसल की शुरुआती अवस्था से लेकर फसल पकने के समय तक किसान लगातार अपने खेत में कीट के प्रकोप के स्त्तर को देंखें तथा कृषि विभाग द्वारा फली छेदक कीट के प्रबंधन एवं निमंत्रण विधियों को अपनायें। कृषि विभाग के कार्मिको द्वारा निरंतर प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर किसानों को उचित सलाह दी जा रही हैं। कृषकों को सलाह दी जाती है कि किसान यथासंभव रसायनों के अंधाधुंध में प्रयोग से बचें। तथा कृषि विभाग के स्थानीय कार्मिको द्वारा तथा किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1800 1801551 पर संपर्क कर सलाह अनुसार सावधानी पूर्वक रसायनों का प्रयोग करें। 

अपने खेत में फली छेदक कीट के नर कीट को आकर्षित करने हेतु लगभग 8 फेरोमोन ट्रेप प्रति हैक्टेयर क्षेत्र में लगाये। एजेडीरिक्टीन 3.03 ई.सी. 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर या नीम की पत्तियों के 50 प्रतिशत गोल को बुवाई के कमशः 70, 85 व 100  दिनों की अवस्था पर प्रणीय छिड़काव करने से फली छेदक कीट पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। जैविक नियंत्रण के लिए विषाणु एन.पी.वी. विषाणु 250 एल. ई का छिड़काव प्रति हैक्टेयर सुबह या शाम के समय करना चाहिए। कीट का प्रकोप आर्थिक हानी स्तर से अधिक होने पर फुल आने से पहले तथा फली लगने के बाद मेलाथियान 5 प्रतिशत या क्यूनालफांस 1.5 प्रतिशत चुर्ण 20 से  25 हैक्टेयर की दर से भुरकाव करे असींचित क्षेत्र में गोनोक्राटोफांस 36 डब्ल्यू एस सी 800 मिली प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करे। आवश्यकता हो तो 15 दिन बाद छिड़काव या भुरकाव पुनः दोहराये ल। यदि फेरोमोन ट्रैप नही लगाये गये हैं तो फुल व फलिया बनते समय फंनवेलरेट 20 ई. सी श. 400 मिली प्रति हैक्टयर या इण्डोक्साकार्य 14.5 एस सी मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जाना उचित रहेगा।

इनका कहना हैं
मध्यम सिंचाई परियोजना के अन्तर्गत बने बांकली बांध क्षेत्र में हमने कृषि पर्यवेक्षक नारायण मेघवाल को किसानों की फसलों को देखने व समय पर दवा छिड़काव की जानकारी दे रहे है।
- फुलाराम मेघवाल कृषि अधिकारी जालोर

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