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दर्दनाक लापरवाही: होलिका दहन में आहुति देने गए 3 मासूमों की दर्दनाक मौत।

दर्दनाक लापरवाही: होलिका दहन में आहुति देने गए 3 मासूमों की दर्दनाक मौत। बिहार/गया। जिले के बौद्ध व हिंदू की प्रसिद्ध धर्मस्थली ढुंगेश्वरी क...

दर्दनाक लापरवाही: होलिका दहन में आहुति देने गए 3 मासूमों की दर्दनाक मौत।



बिहार/गया। जिले के बौद्ध व हिंदू की प्रसिद्ध धर्मस्थली ढुंगेश्वरी के निकट स्थित राहुल नगर के लोगों व बच्चों के बीच रविवार की शाम होली व होलिका दहन को लेकर काफी उत्साह था। होलिका दहन का समय होते ही गांव के लोग अपने अपने घरों से निकल कर होलिका दहन वाले स्थल पर पहुंचने लगे। इसी बीच कलेश्वर मांझी का बेटा रोहित, बाबू लाल का बेटा नंदलाल मांझी और पिंटू मांझी का बेटा उपेंद्र मांझी अपने - अपने घर से थाली में पकवान रखकर परंपरा के अनुसार होलिका में आहुति देने के लिए पहुंचे।
तीनों बच्चे जब होलिका में आहुति दे रहे थे, उस वक्त तक होलिका नहीं जलाई गई थी और लोग होलिका जलाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच होलिका में दो तरफ से आग लगा दी गई। आग लगते ही होलिका प्रचंड हो गई और तीनों बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया। इधर, आग की चपेट में आए बच्चे बचाव की गुहार लगा रहे थे और दूसरी ओर गांव वाले होली है का शोर मचा रहे थे। इसी बीच कुछ गांव वालों की नजर होलिका में तड़प रहे बच्चों पर पड़ी। किसी तरह गांव वालों ने जैसे - तैसे जान पर खेल कर तीनों बच्चों को आग से बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी। तीनों बच्चों ने दम तोड़ दिया था। जानकारी के अनुसार बोधगया प्रखंड की मोराटाल पंचायत के राहुल नगर गांव में होलिका जलाने गए तीन बच्चे होलिका की चपेट में आने से जलकर भस्म हो गए। इस दर्दनाक घटना के बाद रविवार रात से ही पूरी पंचायत में सन्नाटा पसरा है। इस हादसे में मारे गए बच्चों का अंतिम संस्कार गांव की नदी में किया गया। गांव वालों ने न तो किसी बच्चे का पोस्टमार्टम कराया और न ही पुलिस को घटना के वक्त सूचना दी।

अगजा में तीन बच्चों के मरने की खबर जब परिजनों तक पहुंची तो उनकी चीख-पुकार मच गई। रात भर गांव में रोने-चिल्लाने की आवाज गूंजती रही, लेकिन मौके पर कहीं से भी प्रशासन की टीम नहीं पहुंची। जबकि, प्रशासन का दावा है कि जिले के 298 स्थानों पर दंडाधिकारी व पुलिस बल तैनात किए गए थे। इस बात की खबर पुलिस व प्रशासन को सोमवार की सुबह आठ बजे लगी। इधर तब तक गांव वालों ने तीनों बच्चों के शवों का बगैर पोस्टमार्टम कराए ही फल्गु नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया।

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