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विकट परिस्थितियों में जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रही केन्द्र सरकार: राठौड़

विकट परिस्थितियों में जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रही केन्द्र सरकार: राठौड़ देश में कोरोना का प्रकोप बहुत तीव्र गति से बढ़ रहा है और देशभ...

विकट परिस्थितियों में जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रही केन्द्र सरकार: राठौड़




देश में कोरोना का प्रकोप बहुत तीव्र गति से बढ़ रहा है और देशभर के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी दिख रही है, फैक्ट्रियों के बाहर आक्सीजन के खाली टैंकों की कतार इस बात का संकेत है कि केन्द्र सरकार कोरोना को लेकर गम्भीर नही है। कॉंग्रेस युवा नेता आजादसिंह राठौड़ ने बताया कि देश मे  कोरोना आने के एक वर्ष बाद भी कोविड की दूसरी लहर से पूरे देश में चिकित्सा व स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सा गई और सामान्य जनता को ऑक्सीजन, अस्पतालों में बैड, रोजगार  व आजीविका सहित विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जो ये दर्शाता है कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे मूकदर्शक बनकर बैठकर तमाशा देखती रही और समय पर उचित कदम नही उठाये है जिसका खामियाजा आज सामान्य मानवीय को भुगतना पड़ रहा है। अगर केंद्र सरकार इस समय का उपयोग राज्यों की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ोतरी, सूचनाएँ साझा करने और आर्थिक रूप से मदद करने में करती तो ऐसे हालात नहीं देखने को मिलते। राठौड़ ने कहा कि केंद्र सरकार इन विकट परिस्थितियों में राज्यों से बिलकुल मुँह मोड़ कर बैठ गयी है। राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा की लोक डाउन लगाना अंतिम विकल्प है तो पहली लहर में विफल हो चुके लॉकडाउन के पश्चात आमजन को राहत देने के लिए किन विकल्पों को ढूंढ केन्द्र सरकार ने क्या योजनाएं बनाई व क्या क्या नये प्रयास किये माननीय प्रधानमंत्री जी को देश के सामने आकर ये जनता को बताना चाहिए। नयी योजनाएँ बनाने की बजाय प्रधानमंत्री व उनका पूरा मंत्रिमंडल व मशीनरी राज्यों के चुनावों में ही अपना पूरा समय व ताक़त झोंकते रहा।
राठौड़ ने वैक्सीन को लेकर भी केन्द्र सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने वैक्सीन को लेकर लम्बे समय कोई भी निश्चित दिशा निर्देश तय नही करके स्वयं के नागरिकों की माँग की पूर्ति करने की बजाय विदेशों को वैक्सीन निर्यात करके कम्पनीयों के लिये पैसा व खुद की वाहवाही का ज़रिया बनाये रखा। जिसको एक संवेदनशील सरकार के नजरिये से किसी भी प्रकार से उचित नही ठहराया जा सकता है। इस दौरान राठौड़ ने केन्द्र सरकार पर यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि कल केंद्र ने वैक्सीन खरीद का फैसला राज्यों पर छोड़ा था और आज 24 घण्टे के भीतर ही कोविशिल्ड वैक्सीन की दरों में बढ़ोतरी कर दी है जिसके बाद अब कम्पनी 1200 रुपये में निजी अस्पतालों और 800 रुपये में राज्य सरकार को 2 डोज़ की कीमत पर बेचेगी जब एक बार एग्रीमेंट हो चुका तो फिर बढ़ोतरी क्यों ? केंद्र का जिस दर से अनुबंध हुआ है उसी दर पर ख़रीद अगर राज्यों को वैक्सीन पैसा लेकर भी उपलब्ध कराया जाये तो भी कम्पनीयों को जाने वाली एक बड़ी अतिरिक्त रक़म को बचाया जा सकता है। इससे साफ़ नज़र आता है कि इस आदेश में कम्पनीयों को अतिरिक्त मुनाफ़ा देने व दलाली का प्रबंध है।
राठौड़ ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि कोविड की इस अवधि में जब देश ऑक्सीजन की भारी कमी से जूझ रहा है तो भेदभाव पूर्ण नीति अपना कुछ राज्यों को अतिरिक्त सहायता देने में लगा है। उन्होंने बताया कि गुजरात व राजस्थान दोनो राज्यो में बराबर कोविड रोगी होने के बावजूद भी केंद्र सरकार जानबूझकर राजस्थान व गुजरात राज्यों मे ऑक्सीजन सप्लाई करने में भेदभाव कर रही है जो कि किसी भी सूरत में उचित नही है।
इस अवसर पर राठौड़ ने केन्द्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में केन्द्र को राजनीति से ऊपर उठते हुए बड़े देश के संघीय ढाँचे में उसकी भूमिका का ज़िम्मेदारी से निर्वहन करते हुए राज्यो के साथ सहयोग करना चाहिए। असंख्य पैसा आने के बाद पी॰एम॰ केयर फंड ग़ायब सा हो गया है। इस पैसे का सदुपयोग कर राज्यों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बाँटा जाना चाहिये। आपदाओ से निपटने के लिए बनाए गए राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति को विभिन्न मंत्रालयों, राज्यो और विभागों में समन्वय स्थापित करना चाहिए और केन्द्र सरकार को इस स्थिति में बदले व द्वेष की भावना व वोटबैंक और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिये।

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