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कोरोनाकाल में आहत को राहत का प्रयास: 200 पाक विस्थापित दलित महिला दस्तकारों को राहत सामग्री रवाना।

कोरोनाकाल में आहत को राहत का प्रयास: 200 पाक विस्थापित दलित महिला दस्तकारों को राहत सामग्री रवाना। बाड़मेर। कोरोनाकाल में आहत को राहत पहुंचान...

कोरोनाकाल में आहत को राहत का प्रयास: 200 पाक विस्थापित दलित महिला दस्तकारों को राहत सामग्री रवाना।




बाड़मेर। कोरोनाकाल में आहत को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से श्योर संस्था द्वारा सीमावर्ती क्षेत्र के 200 पाक विस्थापित दलित महिला दस्तकारों के परिवारों को राशन सामग्री वितरण हेतु रवाना की गयी। गुरूवार को बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन और जिला कलेक्टर लोकबंधु यादव ने राहत सामग्री के वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
श्योर संस्था की संयुक्त सचिव लता कच्छवाह ने बताया कि महामारी के कारण बीते लम्बे समय से इन परिवारों के पास कोई काम नहीं था और बेरोजगारी की वजह से सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। कच्छवाह ने बताया इन परिवारों की पीड़ा को समझते हुए श्योर के साथ ही मिलाप संगठन के सहयोग से पहली खेप में करीब 200 परिवारों को राशन सामग्री के किट उपलब्ध करवाएं जाएगें। उन्होनें बताया कि एक किट से एक परिवार को करीब दो माह की राशन सामग्री उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया है। 
इस मौके पर श्योर संस्था और मिलाप संगठन के प्रयासों की तारीफ करते हुए विधायक मेवाराम जैन ने कहा कि आहत को राहत पहुंचाना ही महामारी को सबसे बड़ा सबक है। उन्होनें कहा कि आपदाकाल में सहयोग ही सच्ची जनसेवा है। 
जिला कलेक्टर लोकबंधु यादव ने कहा कि कोरोनाकाल में लाॅकडाउन के कारण लोगों का काम काज प्रभावित हुआ है और खास तौर पर जो लोग दैनिक मजदुरी पर निर्भर थे, उनके सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। यादव ने कहा कि बीते कुछ समय से चिकित्सा सुविधाएं एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब जब कोरोना सक्र्रंमण कम हो रहा है, ऐसे में अब प्रभावित लोगों को हरसंभव राहत पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
श्योर संस्था और मिलाप संगठन के प्रयासों की तारीफ करते हुए यादव ने कहा कि संस्था ने आपदाकाल की पीड़ा को समझते हुए सैकड़ों के परिवारों के सामने खड़े हुए खाने-पीने के संकट में मददगार होने का बीड़ा उठाया, जो एक अनुकरणीय पहल है।
वरिष्ठ अधिवक्ता जेठमल जैन ने बताया कि भारत-पाक विभाजन के बाद बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोग पाकिस्तान छोड़कर भारत आ बसे। उन्होनें बताया कि जिले के सीमावर्ती इलाकों में बसे इन पाक विस्थापित दलित परिवारों की महिलाएं हस्तशिल्प की दक्ष कलाकार है और इनकी बदौलत ही राजस्थान के हस्तशिल्प की दूर विदेशों तक धमक है। उन्होनें बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र के अधिकांश परिवारों की आजीविका ही हस्तशिल्प पर ही निर्भर है।
जैन ने बताया कि लाॅकडाउन के कारण बीते लंबे समय से इन महिला दस्ताकारों के परिवारों को कोई काम नहीं मिलने के कारण इनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। उन्होनें बताया कि श्योर संस्था वर्षो से सीमावर्ती क्षेत्रों के इन दलित दस्तकार परिवारों के साथ काम कर रही है। उन्होनें बताया कि आपदा की इस घड़ी में इन परिवारों के रोजी-रोटी का संकट को देखते हुए संस्था ने इन राहत सामग्री उपलब्ध करवाने का बीड़ा उठाया है। 
सामाजिक कार्यकर्ता और श्योर कोषाध्यक्ष नरेन्द्र तनसुखानी ने मिलाप संगठन के सहयोग से गुरूवार को पहली खेप में करीब 200 परिवारों को राशन सामग्री के किट रवाना किए गए है। उन्होनें बताया कि संस्था के वांलेटियर राहत सामग्री के किट गांव-गांव जाकर जरूरतमंद परिवारों को वितरित करेगें। तनसुखानी ने बताया कि राहत सामग्री वाहनों को हरी झंडी दिखाने के मौके पर महेन्द्र कच्छवाह, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अध्यक्ष विनय कुमार, लेखाकार गणेश केला, सुनिल राखेचा, धीरज शर्मा, मोहन सोलंकी, बाबुसिंह सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।

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