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केंद्र सरकार टीकाकरण की ज़िम्मेदारी से पीछे हट रही है: राठौड़

केंद्र सरकार टीकाकरण की ज़िम्मेदारी से पीछे हट रही है: राठौड़ कांग्रेस के युवा नेता आजादसिंह राठौड़ ने वैश्विक महामारी कोविड के गहराते प्रकोप...

केंद्र सरकार टीकाकरण की ज़िम्मेदारी से पीछे हट रही है: राठौड़




कांग्रेस के युवा नेता आजादसिंह राठौड़ ने वैश्विक महामारी कोविड के गहराते प्रकोप के समय देश मे वैक्सीन की कमी व वैक्सीन को लेकर जनता में फैल रहे भ्रम पर चिन्ता जाहिर करते हुए कहा कि देश मे इस वक़्त कोविड रूपी महामारी अपनी चरम सीमा पर है, देशभर के श्मशानो में चिताओ की कतारे लगी है। मौत के भयावह आंकड़े हमारे सामने है। ऐसे में देश मे वैक्सीन की अनुपलब्धता व राज्य सरकारो में उसके मूल्य को लेकर असमंजस व उन पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार व बजट ना होना बेहद चिन्ता का विषय है।
राठौड़ ने बताया कि हमारे देश में कांग्रेस की राजीव गाँधी सरकार ने 1985 में यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम प्रारम्भ किया था। तब से लगातार इस अभियान के तहत टिकाकरण किया जाता रहा है, तो इस कोरोना के टिके को उस से अलग कर राज्य पर अतिरिक्त व्यय का भार क्यूँ लादा जा रहा है। राठौड़ ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह मात्र ज़िम्मेदारीयों से बचने का बहाना ढूँढ रही है।
सरकारों केंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि जब कम दर पर कम्पनीयों से अनुबंध कर लिया था तो अब राज्य सरकारों को उनके रहमों करम पर छोड़ वैक्सीन निर्माताओं से नयें अनुबंध करने को क्यूँ मजबूर किया जा रहा है ? वही कम्पनीयां अब राज्य सरकारों से लगभग दुगनी दरो पर वैक्सीन बेचना चाह रही है। सिर्फ़ राजस्थान को ही लगभग 3000 करोड़ वैक्सीन ख़रीदने पर खर्च करने होंगे। राष्ट्रीय टिकाकरण योजना के तहत वैक्सीनेशन कर राज्यों पर यह अतिरिक्त भार नहीं लदना चाहिये था या कम से कम जिन दरो पर केंद्र का अनुबंध है उसी दर पर राज्यों को उपलब्ध होना चाहिये था। इससे राजस्थान राज्य को 1500 करोड़ अतिरिक्त खर्च करने होंगे जो इस समय राज्य के लिये घातक और काफ़ी नुक़सान दायक होगा। वही यह भारतीय कम्पनीयां अन्य देशों को कम दरों पर वैक्सीन उपलब्ध करवा रही है परंतु राज्यों को अधिक दर पर दे रही है। इस तरह से इस पूरे घटनाक्रम को गहराई से देखने पर इसमें कहीं ना कहीं बड़े घोटाले का अंदेशा नज़र आता है।
राठौड़ ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा वर्तमान में दो प्रकार की वैक्सीन कोविशिल्ड और कोवेक्सिन के बड़ी संख्या में निर्माण होने के बावजूद भी देश मे वैक्सीन की किल्लत होना केन्द्र सरकार की लापरवाही व असंवेदनशीलता का ही नतीजा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 6 करोड़ 60 लाख वैक्सीन विदेशी देशों को भेज दी गयी जिसमें सबसे अधिक 1 करोड़ बांग्लादेश को दी गयी। यू॰ए॰ई॰ व साउथ अफ़्रीका जैसे धनाढ्य देशों को वैक्सीन 12 लाख वैक्सीन दे देना वह भी जब देश का गरीब वैक्सीन को तरस रहा हो तो समझ से परे है। यह सब केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री ने सिर्फ़ अपनी वाहवाही के लिये ही किया है।
राठौड़ ने देश के वर्तमान हालातों पर चिन्ता जताते हुए कहा किकेंद्र सरकार की लापरवाही व कुप्रबंधन के कारण वैक्सीन, ऑक्सीजन व रेमडेसिविर जैसी जीवनरक्षक औषधियों के वितरण में हो रही अनियमितता से हमारे प्रदेश में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है तथा संक्रमित मरीजों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है जो अत्यंत पीड़ादायक व दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्र सरकार को परिस्थिति की गंभीरता को समझ कर सभी जीवन रक्षक औषधियां समयबद्ध व पारदर्शी प्रक्रिया से उपलब्ध करवानी चाहिए ताकि संक्रमण की दर को नियंत्रित किया जा सके तथा इस कोरोना महामारी से लोगों के जीवन की रक्षा की जा सके। वैक्सीन व दवाइयों की किल्लत व असमंजसता को समय रहते दूर करना सख़्त आवश्यक अन्यथा आने वाली पीढियां माफ नही करेगी। राज्यो के पास वैक्सीन की कमी के कारण देश में 1 मई से शुरू हो रहे 18 साल के ऊपर के लोगो का वेक्सिनेशन का कार्य कई राज्यो ने शुरू करने से पहले ही असमर्थता जताई है और कई राज्यो ने तीसरे चरण के वेक्सिनेशन को लेकर हाथ खड़े कर दिए है। कई राज्य सरकारों जिस में मध्यप्रदेश जैसी भाजपा शासित सरकारें भी है कह चुकी है कि वैक्सीन के अभाव में 1 मई से उनके वहां वेक्सिनेशन का तीसरा चरण शुरू नही पायेगा। राठौड़ ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द एक राष्ट्रीय कोविड वैक्सीनेशन पॉलिसी बना कर राज्यों को वैक्सीन उपलब्ध करवाये या जिस कम दर पर केंद्र का अनुबंध है उस पर वैक्सीन उपलब्ध करवाने के लिये कम्पनीयों को बाध्य करे और देश के लोगों और राज्यों को इन विषम परिस्थितियों में राहत पहुँचा कर जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करे।

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