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VIDEO: बाड़मेर में दो भाइयों ने गोद लिया एक गांव, कोविड में दिल खोलकर कर रहे हैं मदद।

VIDEO: बाड़मेर में दो भाइयों ने गोद लिया एक गांव, कोविड में दिल खोलकर कर रहे हैं मदद। देश भर में कोविड 19 की प्रचंड महामारी में हर किसी को अप...

VIDEO: बाड़मेर में दो भाइयों ने गोद लिया एक गांव, कोविड में दिल खोलकर कर रहे हैं मदद।



देश भर में कोविड 19 की प्रचंड महामारी में हर किसी को अपने घर अपने परिवार की चिंता है। इसी फिक्र ने हर किसी को इन हालातों में बेबसी के आलम में लाकर खड़ा कर दिया है लेकिन कुछ विरले ऐसे भी है जो इस आपदा में खुद के परिवार के साथ लोगो के लिए फिक्रमंद है। आज हम बात कर रहे है सरहदी बाड़मेर के एक युवा की जिसने एक नही, दो नही, कुछ परिवार नही पूरा गाँव ही गोद ले लिया है। यह युवा उधमी हजारों की आबादी के गाँव की कोविड की हर जरूरत को बखूबी अंजाम दे रहे है। इनका कहना है कि इन हालातों में किसी को ना भूखा सोने दूँगा और ना ही किसी को इलाज की कमी आने दूँगा। सरहद के अंतिम छोर पर बसे बाड़मेर से पेश है खास खबर " पूरा गाँव ही ले लिया गोद" 


देश भर में हाहाकार है, कोविड 19 के हालातों की वजह से हर कोई बेहाल है। इन विपरीत हालातों में हर सरकार, हर कोई मदद की गुहार कर रहा है लेकिन इन सभी के बीच कुछ ऐसे भी है जिनके कदम सही मायने में किसी मिसाल से कम नही है। सरहदी बाड़मेर के जूना गाँव मे 5 से 7 हजार की आबादी है। इस गाँव को सेनेटाइज किया जा रहा है और हर दिहाड़ी मजदूर को उसके घर मे फूड पैकेट पहुँच रहा है। इस गाँव मे कोविड से संक्रमित होने वाले हर शख्स का बेहतर ईलाज हो रहा है और यह सब कुछ दो युवा भाई करवा रहे है। दरअसल समाजसेवी और बड़े उधोगपति स्वर्गीय तनसिंह चौहान का पैतृक गांव है जूना। उनके बीते साल दुनिया से कूच कर जाने के बाद उनके दोनों बेटे जोगेंद्र सिंह चौहान और राजेंद्र सिंह चौहान ने कोविड के विपरीत हालातों में इस गाँव को गोद ले लिया है। अब गाँव के लोग बिना चिंता अपने गाँव मे है और गाँव की सुरक्षा के लिए चौहान भाईयों के लोग मुस्तेद नजर आ रहे है। ग्रामीण बताते हैं कि बरसो से चौहान परिवार इस गाँव के दुःख दर्द से जुड़ा हुआ है और इस महामारी में इन नाता बदस्तूर जारी है।
ऐसा नही है कि चौहान बंधुओं ने महज पैसे देकर गाँव की ज़रूरतों को पूरा करके इतिश्री कर ली है। बकायदा दोनों भाईयों में से हर कोई अपने बिज़ी शेड्यूल में से वक़्त निकाल कर इस गाँव पहुँच जाते है और अपने गाँव के लोगो से तफशील से बात भी करते है। हर गली , हर घर की फिक्र करने के साथ गाँव के हर परिवार से उनके सुख दुःख से भी रूबरू होते नजर आ रहे है। युवा उधमी जोगेंद्र सिंह चौहान बताते है कि इस गाँव से जन्म से नाता है ऐसे में कोरोना के विकट हालातो में विपरीत हालातों में वह अपना गाँव के प्रति जो फर्ज बनता है वह निभा रहे है।
सरहदी बाड़मेर में यह चौहान बन्धु कोविड के हालातों में जिला प्रशासन को करोड़ो रुपए की मदद दे चुके है और खुद की तरफ से 450 आक्सीजन सिलेंडर देने का अहम काम कर चुके है लेकिन हजारों की आबादी के एक गाँव मे आज यह सही मायने में जीवनदाता बने नजर आ रहे है।

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