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धोरीमन्ना में चातुर्मास में स्वाध्याय, तत्व ज्ञान की कक्षाओं में बालगोपाल, युवा व वृद्ध ले रहे प्रतिदिन ज्ञान।

धोरीमन्ना में चातुर्मास में स्वाध्याय, तत्व ज्ञान की कक्षाओं में बालगोपाल, युवा व वृद्ध ले रहे प्रतिदिन ज्ञान। बाड़मेर/धोरीमन्ना 02 अगस्त। धर...

धोरीमन्ना में चातुर्मास में स्वाध्याय, तत्व ज्ञान की कक्षाओं में बालगोपाल, युवा व वृद्ध ले रहे प्रतिदिन ज्ञान।




बाड़मेर/धोरीमन्ना 02 अगस्त। धर्म नगरी धोरीमन्ना में श्री कुशल कांति प्रताप नगर में वसीमालाणी रत्नशिरोमणि आचार्य प्रवर श्री जिन मनोज्ञसूरीश्वरजी म.सा. व नयज्ञसागर जी म.सा. व साध्वी जयरत्ना श्री जी म.सा. की पावन निश्रा में चल रहे चातुर्मास के दौरान दैनिक प्रवचन माला में सोमवार को आचार्य प्रवर श्री जिन मनोज्ञसूरीश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में आराधकों सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति जिसे गृहस्थ कहते हैं उन गृहस्थो को सद्गृहस्थ बनना है। आत्म अवलोकन करना है, चित्रकार के चित्रकारी की भव्यता तभी प्रदर्शित होती है, जब जहां चित्र बनाना हो वह जगह स्वच्छ सपाट सुंदर होना चाहिए। वह अच्छी जगह के बिना अपनी कला को उकेर नहीं सकता। ऐसे ही एक गृहस्थ को सद् गृहस्थ बनने के लिए हृदय को सपाठ स्वच्छ सुंदर निर्मल भाविक बनाना जरूरी है। हर व्यक्ति सुखी बनना चाहता है कि मैं सुखी बनू। लेकिन व्यक्ति दुखी हो रहा है या दुखी बन जाता है तो उसका कारण क्या हैं? तो महापुरुष फरमाते हैं दुखी होने का कारण व्यक्ति स्वयं है, दुखी होने के लिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है पर सुखी बनने के लिए अनंत काल कि कषाय को दूर करना चाहते है, तो मेहनत करने की आवश्यकता है और वह मेहनत महापुरुषों की देशना अमृतवाणी को सहजता सावधानी निष्ठा से श्रवण करेंगे तो जीवन को नई दिशा प्राप्त होगी। वर्तमान में व्यक्ति कर्मों के जंजाल विचारों की इहापोह चिंतन के उठापटक में मकड़ी के जाल की तरह फंसा हुआ है और इस जाल वही फंसता है जो दूसरों को फसाने की कोशिश करता है। व्यक्ति धनवान सत्तावान ऐश्वर्यवान हो सकता है, यह सब होने पर भी यदि अभी तक सद्.गृहस्थ नहीं बने हैं। अब हमें सद् गृहस्थ बनने के लिए प्रयत्न करना है, साधु बनने के लिए भी सद् गृहस्थ बनना जरूरी है साधु का जीवन निर्भय तो गृहस्थ का जीवन मुश्किलमय होता है। सज्जन लोगों की मित्रता करनी चाहिए जैसी संगति वैसे ही विचार उत्पन्न होता है। परमात्मा दर्शन गुरुवाणी निष्फल नहीं जाते। गुरु भगवंत की कृपा से गुरुओं की मेहर दृष्टि गुरु आशीर्वाद रूपी प्रसाद हमें इसलिए प्राप्त नहीं होता क्योंकि हम अपने मन के मैल को लेकर सभी जगह जाते हैं। उपदेश उसके लिए जो समझदारी से अपना और दूसरों का कल्याण कर सके। व्यक्ति स्वयं में निर्मल स्वच्छ ना हो तो उपदेश का फल प्राप्त नहीं कर पाता। श्री शान्तिनाथ जैन श्री संघ धोरीमन्ना के ट्रस्टी ओमसा गांधी ने बताया कि चातुर्मास में तप आराधना की कड़ी में सोमवार को पंच परमेष्ठी श्रेणिक तप की तपस्या के तीसरे चरण का प्रथम उपवास एवं सांकलिया तेला और आयम्बिल की तपस्या नियमित जारी है। प्रतिदिन दोपहर में स्वाध्याय तत्व ज्ञान की कक्षा में अनेक बाल गोपाल, युवा, वृद्ध ज्ञान ले रहे हैं। गांधी ने बताया कि रविवार को रात्रि में तपस्वियों की अनुमोदना के लिए भक्ति भावना का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें संगीतकार दिलीप भाई सिसोदिया ने भजनों की सरिता बहाई। सोमवार को जैन श्री संघ तिलोड़ा, जैन श्री संघ चितलवाना और कई बाहर से पधारे हुए गुरूभक्तों का श्री शान्तिनाथ जैन श्री संघ धोरीमन्ना द्वारा अभिनन्दन किया गया और गुरूभक्त जयन्तिलाल पारसमल हंजाजी मुणोत परिवार द्वारा संघ पूजन किया गया। चातुर्मास में प्रतिदिन प्रवचन का समय प्रातः 9 बजे से रहेगा।

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