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जल जीवन मिशन के जिला सलाहकारों ने मानदेय बढ़ोतरी को लेकर विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखी मांग जताया रोष

जल जीवन मिशन के जिला सलाहकारों ने मानदेय बढ़ोतरी को लेकर विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखी मांग जताया रोष बाड़मेर। जल जीवन मिशन के तहत राज्य क...

जल जीवन मिशन के जिला सलाहकारों ने मानदेय बढ़ोतरी को लेकर विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखी मांग जताया रोष




बाड़मेर। जल जीवन मिशन के तहत राज्य के सभी जिलों में कार्यरत सलाहकारों ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के समक्ष रोष जताया है। अखिल भारतीय पेयजल एवं स्वच्छता संविदा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले संविदा पर नियुक्त ये सलाहकार विभाग के डबल्यूएसएसओ (जल एवं स्वच्छता मिशन) भवन में एकत्र हुए एवं विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर इन सलाहकारों ने डबल्यूएसएसओ के बाहर धरने की चेतावनी दी है। ये सलाहकार डबल्यूएसएसओ के निदेशक एच.सी. वर्मा, अधिशासी अभियंता निशा शर्मा व अन्य अधिकारियों से मिले एवं ज्ञापन सौंपा।



महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कुमार सारस्वत ने अधिकारियों को ज्ञापन देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का नाम बदलकर अब जल जीवन मिशन कर दिया गया है। इसी मिशन में राज्य व जिला सलाहकारों को समाहित कर दिया गया है। इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2011 में राज्य स्तर पर राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन तथा प्रत्येक जिला मुख्यालय पर जिला जल एवं स्वच्छता मिशन का गठन किया गया था। इस गठन के बाद जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख शासन सचिव के आदेशों के तहत राज्य व जिला स्तर पर सलाहकारों की नियुक्ति संविदा पर की गई थी। केन्द्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी जल जीवन मिशन की मार्गदर्शिका में सलाहकारों के पदों को भी समाहित कर लिया गया है। जिला स्तर पर संविदा पर नियुक्त इन सलाहकारों को वर्ष 2011 में 25 हजार रूपए मासिक मानदेय पर नियुक्त किया गया था। सेवा शर्तों के अनुसार प्रति वर्ष दस प्रतिशत मानदेय वृद्धि प्रस्तावित था, इसके बावजूद इन सलाहकारों की वेतन वृद्धि नहीं की गई है। इस संबंध में विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसी बीच जो जिला स्तरीय सलाहकारों के जो पद रिक्त रह गए थे एवं नौकरी छोडऩे से रिक्त हुए पदों को भरने के लिए विभाग की ओर से डीपीएमयू का गठन करने का प्रस्ताव लाया गया और इस प्रस्ताव के तहत यह कार्य निजी फर्म को देने के लिए निविदा निकाली गई। इस निविदा में इन्हीं पदों के सलाहकारों का मानदेय 47 हजार रूपए तक रखते हुए निजी फर्मों के नाम पर डबल्यू एस एस ओ की ओर से निर्देश भी जारी कर दिए गए है। जबकि दस वर्ष पूर्व के उच्च योग्यताधारी व अनुभवी सलाहकार मात्र 25 हजार रूपए मानदेय पर कार्य करने को मजबूर हैं। इसलिए उनके मानदेय को हर वर्ष दस प्रतिशत वेतन वृद्धि करते हुए मानदेय निर्धारित किया जाए। उनकी इस मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो सभी जिलों के सलाहकारों के साथ डबल्यू एस एस ओ के बाहर धरना देंगे।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक धमेन्द्र दुबे ने कहा कि केन्द्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी दिशा निर्देशों के आधार पर सभी राज्यों में जल एवं स्वच्छता मिशन के तहत सलाहकार नियुक्त हैं। अन्य राज्यों में साल दर साल मानदेय में बढ़ोतरी तथा उन्हें आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई गई है। इस संबंध में अन्य राज्यों के दस्तावेज भी उनके पास उपलब्ध हैं। जबकि राजस्थान में नियुक्त सलाहकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उनकी मानदेय वृद्धि तो दूर उन्हें यात्रा भत्ता भी नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि उन्होंने विधिवत रूप से अधिकारियों को आखरी बार अवगत कराने के लिए सभी सलाहकारों के हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन अधिकारियों को सौंप दिए हैं। राष्ट्रीय महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष अतुल शर्मा का कहना था कि वे बार- बार अधिकारियों को इस संबंध में अवगत करा चुके हैं। इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई है। केन्द्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों को भी इस बाबत अवगत कराया गया है तथा उन्हें ज्ञापन की प्रति भेजी गई है। आगामी सप्ताह में अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ जल शक्ति मंत्री के साथ- साथ मंत्रालय के प्रमुख शासन सचिव व अन्य अधिकारियों के समक्ष भी वे अपनी समस्याएं रखेंगे। इस मौके पर सभी जिलों के जिला सलाहकार मौजूद थे।

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