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VK Pingal की पुस्तक का विमोचन "उलझा जीवन अपने दिमाग से स्वयं हल करें"। लिंक पर जाकर खरीद सकते हैं।

VK Pingal की पुस्तक का विमोचन "उलझा जीवन अपने दिमाग से स्वयं हल करें"। लिंक पर जाकर खरीद सकते हैं। हमारे मानव समाज के लिए बहुत ही ...

VK Pingal की पुस्तक का विमोचन "उलझा जीवन अपने दिमाग से स्वयं हल करें"। लिंक पर जाकर खरीद सकते हैं।




हमारे मानव समाज के लिए बहुत ही बड़े गर्व की बात है। गांव बायतु, बाड़मेर के रहने वाले वीरमाराम/केशाराम जी सुथार (पिंगल) जिन्होंने जीवन के आधार पर एक पुस्तक लिखी है - "उलझा जीवन अपने दिमाग से स्वयं हल करें"
इस पुस्तक में उन्होंने हर व्यक्ति के जीवन में छोटी-से-छोटी बातों से उत्पन्न होने वाली उलझनों को बड़े ही साधारण और साफ़ शब्दों में समझाया है। ये लिखते हैं कि हर समस्या का समाधान आदमी के अपने दिमाग़ में ही मौजूद है, केवल उसे समझना पड़ता है, समस्या को समझने में ही आधा उत्तर मिल जाता है। लेकिन आदमी इसे समझ नहीं पाता।



मैंने जब इस किताब के शुरुआती पन्नों को पढ़ा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा, वीरमजी के विचारों से मैं बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुआ।
ये लिखते हैं कि आम-आदमी की समस्या मन का अशांत रहना है, ये सारी समस्याएं अकेलेपन में इंसान को झकझोर देती है, आदमी मंगल ग्रह पर जाकर जीवन बिताने की खोज कर रहा है लेकिन अपने ही अंदर बैठे परमात्मा को खोज नहीं पा रहा है, अपनी छवि चमकाने के लिए दिखावटी जीवन से जीवन बर्बाद कर देता है, दूसरों पर निर्भरता दुर्बल बना देती है, कोई भी परिर्वतन करने का डर जीवन में ऊपर नहीं उठने देता, हमेशा सच के साथ जीना चाहिए, मन में तरह-तरह के विचार तनाव पैदा कर देते हैं, मन पर ज्यादा बोझ लेने से मनोरोग की बीमारी हो जाती है और इससे युवा आत्महत्या की ओर गलत कदम उठा लेता है, नशे की आदत और लत ज़िंदगी को अंधेरे में धकेल देती है। इस तरह के विचारों को पढ़कर मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।
युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए आप भी इस पुस्तक को खरीदकर पढें ताकि इनका भी हौसला बढ़े और आगे भी इस तरह की पुस्तकें लिखते रहें ताकि युवाओं को नई प्रेरणा मिलती रहे।

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