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...आप आहत हुए तो मेरी भी और उसकी भी आफत!(पूर्ण आदर के साथ जोधपुर के लाडले मुख्यमंत्री के नाम)

...आप आहत हुए तो मेरी भी और उसकी भी आफत! (पूर्ण आदर के साथ जोधपुर के लाडले मुख्यमंत्री के नाम) आपके अपने जोधपुर की Wall City , जहां मेरे बुज...

...आप आहत हुए तो मेरी भी और उसकी भी आफत!
(पूर्ण आदर के साथ जोधपुर के लाडले मुख्यमंत्री के नाम)



आपके अपने जोधपुर की Wall City, जहां मेरे बुजुर्गों की दुआओं से मेरा बचपन बीता। आपका भी उस मोहल्ले, उस गली में आज भी आना-जाना है। जाना पहचाना और प्रशासनिक जुबां में अतिसंवेदनशील क्षेत्र में Listed मेरा मोहल्ला उम्मेद चौक है। न जात पर- न पांत पर, इंदिरा जी की बात पर, मोहर लगेगी हाथ पर। बहुत बालपन में लेकिन टैक्सी पर लगे भौंपू से गूंजता ये नारा आज भी याद है। आप इतने लाडले रहे कि आपका उस मोहल्ले में तब से लेकर आज तक आना, मानो किसी देवीय आगमन से कम नहीं। लेकिन इस बार जब आप सीएम बने हो। या तो सरकार बचाने के लिए होटलों में रहे हो या फिर दिल्ली दरबार में। जोधपुर पानी पर तैर रहा हो या फिर युवा अंधकार में एक के बाद एक परीक्षा रोशनी के इंतजार में दे रहा हो। सब आपको कुछ सुनाना चाहते हैं। लेकिन आपको सुनाने में आज कल एक डर है। और वो है कि कहीं आप आहत न हो जाओ। आपका आहत होना यानी सामने वाले की आफत। लेकिन मैं आपको कुछ कहना या लिखना ही नहीं चाहता। बल्कि आपकी पार्टी के ही एक गांधीवादी हस्ताक्षर मरहूम जनाब अब्दुल हादी (7 बार के चौहटन विधायक) के परिवार से आज भी आदर्श राजनीति करने वाली उनकी पुत्र वधू का सोशल मीडिया पर लिखे खुले खत की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं, जो मेरी इस पोस्ट के साथ पेस्ट कर रहा हूं। 



उम्मीद है आप अपनी पार्टी के अपनों की तो सुनेंगे। हां, एक निवेदन है कि प्रधान के लिखे इस खत को सकारात्मक लेना। क्योंकि आप आहत हो गए तो उस युवा नैत्री का कल आफत में आ जाएगा।
सादर
निखिल व्यास

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