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सेहत के लिए लाभदायक काचरा की सब्जी की इस वर्ष पैदावार कम, मांग अधिक।

सेहत के लिए लाभदायक काचरा की सब्जी की इस वर्ष पैदावार कम, मांग अधिक।  देशी काचरा स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक औषधी बाड़मेर। खरीफ की फसल बाजरा...

सेहत के लिए लाभदायक काचरा की सब्जी की इस वर्ष पैदावार कम, मांग अधिक। 



देशी काचरा स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक औषधी
बाड़मेर। खरीफ की फसल बाजरा इस बार अच्छी मात्रा में होने से छोटे काचरा की सब्जी बहुत कम हुई है। आमजन सहित दूरस्थ शहरों में इस बार हरे काचरा सब्जी की मांग अधिक है। दीपावली पर्व के बाद छोटे काचरा की पैदावार बाजार में आनी शुरू हो जाती है, जो दो-तीन महिने रहती है लेकिन अबकी बार काचरा की उपलब्धता कम होने पर ग्रामीण लोग भी वर्ष पर्यन्त सब्जी के लिए जुगाड़ नही कर पाए है। 
काचर /काचरा औषधीय फल हैं। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। काचरा को उगाया नहीं जाता हैं अपितु इसकी बेल वर्षा के मौसम में विशेष रूप से खरीफ की फसल के दौरान खेतों में स्वत: ही उत्पन्न हो जाती हैं।
जब इसके लगने वाले फल कच्चे होते हैं तो हरे तथा सफेद रंग लिए हुए चितकबरे होते हैं और अत्यंत कड़वे होते हैं। पकने पर यह पीले पड़ जाते हैं। अधपक्के तथा पूर्ण पक्के काचरा में अत्यंत मधुर एवं भीनी-भीनी खुशबू आती रहती हैं। काचरा कच्ची अवस्था में अत्यंत कड़वे एवं पकने पर खट्टे-मीठे हो जाते हैं। दीपावली त्योहार के बाद छोटे काचरा सब्जी बनाने के लिए उपयोगी हो जाते है। 
काचरा की ग्वार फली, मोठ फली, मूली, आलू, हरी मिर्च के साथ मिलाकर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती हैं। काचरा और दही के साथ रायता / कढी जायकेदार बनाई जाती है।
देशी बाजरा की रोटी और गाय के घी के साथ चूरकर काचरा सब्जी खाने से इनके सामने अन्य सब तरह की सब्जियां फीकी पड़ जाती हैं। काचरा का अचार, चटनी अच्छी बनाई जाती हैं। शादियाँ सीजन के समय पंचकुट्टा ( कैर, कुमटिया, सांगरी, काचरा ) सब्जी बनाने के दौरान अन्य सुखी सब्जियों के साथ सुखे काचरा की मांग बढ जाती हैं और 400-500 रू प्रतिकिलो भाव से बिकते है।
पर्यावरण कार्यकर्त्ता भेराराम आर भाकर बताते है कि काचरा की सब्जी भूख बढाने के साथ कब्ज, अपच, जुकाम, पित्त, कफ, परमेह की समस्या को कम करती हैं। काचरा पथरी को नष्ट करने में मददगार हैं। इसमे विटामिन सी सहित अन्य पोषक तत्त्व पाए जाते हैं। सुखी हुई काचरा रूचिकारक तथा भोजन में अरूचि, पेट में कीड़े, जड़ता इत्यादि को दूर करने वाली होती हैं। सुखी हुई काचरा को वर्ष पर्यन्त घर में रखकर सब्जी बनाने के काम में लिया जा सकता हैं।

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